सलेमपुर/देवरिया। पूरे वर्ष में पड़ने वाली 12 संक्रांतियों में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। यह पर्व सनातन धर्म एवं संस्कृति को मानने वाले लोगों द्वारा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। इसी दिन से सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे सूर्य का उत्तरायण भी कहा जाता है। इसके साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा और सभी शुभ कार्य पुनः प्रारंभ हो जाएंगे।
यह जानकारी देते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि इस वर्ष मकर संक्रांति की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हृषिकेश पंचांग के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी 2026 को रात्रि 9 बजकर 41 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। रात्रि में संक्रांति होने के कारण मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय के बाद प्राप्त होगा।
आचार्य ने बताया कि निर्णय सिंधु के अनुसार भी मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को ही मान्य है। शास्त्रों में सूर्योदय काल में किए गए स्नान और दान को सर्वाधिक पुण्यदायक बताया गया है। इस दिन किए गए कार्यों में निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालु गंगा, यमुना, सरयू, नर्मदा सहित पवित्र नदियों एवं सरोवरों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और दान-पुण्य करते हैं। पूरे दिन स्नान-दान का शुभ फल प्राप्त होता है। इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, मूंग की दाल का दान विशेष पुण्यदायक माना गया है। साथ ही शीत ऋतु को देखते हुए निर्धन एवं जरूरतमंद लोगों को गर्म वस्त्र और अन्न का दान करना भी श्रेष्ठ फलदायी होता है। आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि खरमास के दौरान जो शुभ कार्य वर्जित रहते हैं, वे मकर संक्रांति के साथ ही पुनः प्रारंभ हो जाते हैं।