गोदामों से ही शुरू हो जा रही घटतौली
300 आईं शिकायतें, 13 कोटेदारों पर हुई कार्रवाई, 1469 है कोटेदार
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। सरकारी राशन पर माफिया का वर्चस्व प्रशासन कम नहीं कर पा रहा है। गोदामों से कोटेदार तक राशन पहुंचते-पहुंचते 200 क्विंटल में तीन से चार क्विंटल कम हो जाता है। घटतौली कई स्तर पर हो रही है। इसका नुकसान गरीबों को उठाना पड़ रहा है। घटतौली के चक्कर में 13 से अधिक कोटेदारों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इसमें छह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
जिले में 1469 कोटें की दुकानें हैं। कोरोना का दौर शुरू होने के बाद गरीबों को राशन देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिले में तकरीबन दो लाख 25 हजार से अधिक जॉबकार्ड धारक हैं। इसमें एक लाख 25 हजार ऐसे हैं जिन्हें काम नहीं मिल सका है। ऐसे मजदूरों को राशन देने के निर्देश हैं। गेहूं तीन किलो, चावल दो किलो और लाल कार्ड पर 35 किलो राशन दिया जा रहा है। इसमें घटतौली को लेकर 300 से अधिक शिकायतें कंट्रोल रूम में आ चुकी है। राशन माफिया के तार विभागीय अधिकारियों से लेकर कोटेदारों तक जुड़े हैं। भारतीय खाद्य निगम से प्राप्त खाद्यान्नों की आपूर्ति उत्तर प्रदेश राज्य भंडार निगम के उसरा बाजार एवं रघवापुर स्थित गोदामों से किया जाता है। राशन गोदामों से निकलने वाले ट्रकों में वजन से मिलता है। इसके बाद मार्केटिंग के गोदामों तक राशन पहुंचने पर बोरों में वजन कम हो जाता है।
ऐसे होती है घटतौली
विभागीय सूत्रों की मानें तो एफसीआई से 400 बोरा यानी 200 क्विंटल मिलता है। राशन मिलते ही धर्मकांटा पर तौल होती है। वहां एक से डेढ़ क्विंटल कम होता है। फिर आरएफसी गोदाम जाता है। वहां से डोर-टू-डोर स्ट्रैप ठेकेदार को राशन दिया जाता है। राशन देने से पहले तौल गोदामों पर होती है। इसमें तौल में खेल हो जाता है। इसके अलावा एक बोरा का वजन तकरीबन 600 ग्राम का होता है। जबकि खाद्यान्न दिए जाने के दौरान गेहूं एवं चावल का वजन बोरों का वजन बढ़ाकर नहीं दिया जाता है। विकास खंड गोदाम से डीलर कोटेदारों को खाद्यान्न देता है। इसकी वजह से कोटेदार उपभोक्ताओं से हर यूनिट पर घटतौली करता है।
कोट:
घटतौली की तकरीबन 300 शिकायतें कंट्रोल रूम में आईं हैं। जांच में कुछ फर्जी शिकायतें मिलीं हैं। जहां घटतौली की पुष्टि हुई है, ऐसे छह मामलों में प्राथमिकी एवं सात दुकानें निलंबित की गईं हैं। 25 हजार से अधिक जुर्माना वसूल किया गया है।
-विनय कुमार सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी।