बैतालपुर। देवरिया शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए फोरलेन बाईपास निर्माण दो साल बाद भी कानूनी अड़चन में फंसा है। गोरखपुर-सलेमपुर हाईवे बाईपास अभी 30 प्रतिशत ही बन सका है। वजह यह है कि अभी भी 644 किसान अलग-अलग कोर्ट में मुआवजे के लिए मुकदमा लड़ रहे हैं। लोअर कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक अलग-अलग मामलों की सुनवाई चल रही है। हालांकि, हर जगह मांग केवल मुआवजे पर आकर टिकी है।
करीब 22 किलोमीटर लंबे बाईपास मार्ग पर सिरजम गांव के पास से शुरू होकर इटवा, गुडरी, बैतालपुर, सझवां, बरारी प्रथम, बांसपार बुजुर्ग, मुंडेरा, बरारी गौरा, भीमपुर गौरा, चकरवा धूस, घटैला चेती, पोखारभिंडा और मुंडेरा बुजुर्ग होते हुए अहिल्यापुर मोड़ के सामने देवरिया-सलेमपुर मुख्य मार्ग में मिलेगी। बाईपास कार्य पूरा करने की समय सीमा जुलाई 2027 है।
बाईपास का निर्माण पूरा होने पर सलेमपुर, भाटपार रानी, बलिया और बिहार की तरफ जाने वाली गाड़ियां शहर के बाहर से ही निकल जाएंगी। उधर से आने वाली गाड़ियां भी शहर में प्रवेश किए बिना ही अपने गंतव्य को चली जाएंगी।
किसानों की याचिकाओं से फंसा मामला : भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की दर को लेकर 644 किसान प्रशासन की तरफ से तय मुआवजे को कम बताते हुए न्यायालय की शरण में चले गए। इनमें 33 मुकदमे इलाहाबाद हाईकोर्ट में जबकि 611 मुकदमे लोअर कोर्ट में लंबित हैं। हाईकोर्ट में दाखिल प्रमुख याचिकाओं में बरारी प्रथम से धनंजय मणि एवं दो अन्य, भीमपुर गौरा से सुरेंद्र तिवारी और चार अन्य, चकरवा धुस से किसुनदेव यादव एवं छह अन्य, घटैला चेती से अमित तिवारी एवं पांच अन्य, पोखारभिंडा से हरिश्चंद्र एवं दो अन्य तथा मुंडेरा बुजुर्ग से ध्रुव नारायण चौहान एवं आठ अन्य किसानों ने भूमि मुआवजे की धनराशि बढ़ाने की मांग उठाई है। घटैला चेती गांव निवासी अमित तिवारी का कहना है कि जिला प्रशासन भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम-1956 के विपरीत जाकर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि काश्तकार किसी भी कीमत पर गलत तरीके से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने देंगे। उचित मुआवजा के लिए ही विभिन्न याचिकाएं न्यायालय में दाखिल की गई हैं।