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केवल संवाद का माध्यम नहीं है भाषा ः डॉ. इन्दीवर

Wed, 14 Sep 2016 11:12 PM IST
देवरिया
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हिंदी दिवस पर लोगों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। - फोटो : अनूप तिवारी
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देवरिया। हिंदी दिवस पर बुधवार को कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। नागरी प्रचारिणी सभा में आयोजित कार्यक्रम में नागरी भूषण सम्मान से सम्मानित एवं साकेत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. इन्दीवर पांडेय ने कहा कि भाषा केवल संवाद या संपर्क का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, संवेदना और पहचान का प्रतीक है। एक भाषा के मिटने का मतलब है एक संस्कृति का विलुप्त होना। उन्होंने कहा कि यदि हमें हिंदी की सच्ची सेवा करनी है तो अपने समाज से जुड़ना होगा।
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इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी सदर सचिन सिंह ने किया। उनका साथ सभा के अध्यक्ष सुधाकर मणि त्रिपाठी, गोपाल कृष्ण सिंह, कौशल किशोर मिश्र ने दिया। सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आचार्य परमेश्वर जोशी ने मंगलाचार एवं पाठ किया। धर्मदेव सिंह ने वाणी वंदना की। डॉ. योगेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि हिंदी सेवा का अर्थ है देश की सेवा। डॉ. रमाकांत कुशवाहा ने कहा कि यह अवसर मेरे लिए बेहद सुखद और सुंदर है। इस मौके पर डॉ. जयनाथ मणि त्रिपाठी, राजनारायणाचार्य, बृजेश पांडेय, अरुण बरनवाल, अनिल तिवारी, अशोक पांडेय, डॉ. भावना सिन्हा, जगन्नाथ श्रीवास्तव, वैद्य मिथिलेश शुक्ल आदि ने विचार व्यक्त किए।

डिस्ट्रिक बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट की ओर से आयोजित दीवानी न्यायालय परिसर में हिंदी दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष सुभाष चंद्र राव ने की। इस मौके पर लल्लन मिश्र, विष्णु गोयल, श्याम नारायण मणि त्रिपाठी, राधेश्याम पाठक, संजय सिंह आदि मौजूद थे। एमए हिन्दी अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं का स्वागत समारोेह भी आयोजित किया गया।
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इस दौरान प्रियंका पांडेय ने सरस्वती वंदना, सुमन विश्वकर्मा और पूजा मिश्रा ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
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