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Deoria News: मेडिकल कॉलेज में बर्न वार्ड को ही इलाज की जरूरत, जानिए मरीजों को कैसे होती है परेशानी- सब बेफिक्र

Sun, 07 Apr 2024 12:34 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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देवरिया मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
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मेडिकल कॉलेज बने तीन साल हो गए हैं। लेकिन, गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज का इंतजाम नहीं हो सका है। ऐसे में उनका इलाज नहीं हो पाता है। रेफर कर दिया जाता है।
इससे मरीजों को गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी की ओर रुख करना पड़ता है।

इससे उन्हें परेशानी तो होती ही है, आर्थिक बोझ भी पड़ता है। यहां मामूली जले मरीजों को एक ही वार्ड में रखा जाता है। इससे उन्हें इंफेक्शन का खतरा बना रहता है। बर्न वार्ड बन जाने से मरीजों को काफी सहूलियत होगी।
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गर्मी के मौसम में आग की घटनाएं होती हैं। इन दिनों तापमान बढ़ने के साथ ही आग की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।

इस दौरान आग की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलसे लोगों को लेकर परिजन महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में आते हैं। लेकिन, बर्न वार्ड और संसाधन के अभाव में इलाज की सुविधा नहीं मिल पाती है। मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर भेज दिया जाता है।

अस्पताल में चाय, गर्म पानी, दूध व अन्य तरह से मामूली रूप से झुलसे लोगों का ही उपचार किया जा रहा है। इन मरीजों को सर्जिकल वार्ड में एक तरफ भर्ती कर इलाज किया जाता है। महिला को फीमेल सर्जिकल वार्ड के गलियारे में स्थित बेड पर भर्ती कर किसी तरह इलाज किया जाता है।
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देवरिया मेडिकल कॉलेज।संवाद - फोटो : DEORIA
वार्ड में बरियारपुर क्षेत्र की किशोरी का इलाज चल रहा था। तीन दिन पहले छोटे गैस सिलिंडर पर खाना बनाते समय लगी आग से उसका चेहरा, हाथ झुलस गया है। वहीं, भाटपाररानी क्षेत्र की एक महिला गर्म तेल गिरने से जल गई।

दोनों काे भर्ती किया गया। न तो उन्हें मच्छरदानी में रखा गया है और न ही संक्रमण से बचाव के इंतजाम किए गए हैं। किसी तरह उनका उपचार किया जा रहा है। जबकि इन मरीजों में संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। परिजनों का कहना है कि बोतल, दवा, मरहम लगाया जा रहा है। गर्मी से परेशानी हो रही है।

बर्न वार्ड में यह रहती है व्यवस्था
झुलसे मरीजों के इलाज में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इन्हें संक्रमण फैलने की अधिक आशंका है। इस तरह के मरीजों के इलाज के लिए अलग से वार्ड बनाया जाता है। इसमें सेपरेट व अलग-अलग कमरे रहते हैं। जो एसीयुक्त व पंखा होना चाहिए।

हर मरीज को मच्छरदानी की व्यवस्था के अलावा प्लास्टिक सर्जरी के डॉक्टर, जनरल सर्जन, फिजीशियन, ट्रेंड स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय की तैनाती होनी चाहिए। ओटी भी होनी चाहिए। सेकेंड्री संक्रमण में बैक्टीरिया के फैलने की ज्यादा आशंका होती है। इससे बचाव की भी व्यवस्था रहती है।

सीएमएस डॉ. एचके मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में झुलसे मरीज कम आते हैं। मामूली रूप से झुलसे मरीजों का इलाज अस्पताल में किया जाता है। उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। बर्न वार्ड न होने से गंभीर मरीजों के इलाज में दिक्कत आ रही है।

इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ट्राॅमा सेंटर का निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें बर्न वार्ड बनना है। इसके पूरा होने पर गंभीर मरीजों के इलाज में आसानी होगी। इसके बाद मरीजों व तीमारदारों को सहूलियत होगी।
 
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