अभियान चलाकर खोजे जाएंगे कालाजार के मरीज
डब्ल्यूएचओ के सहयोग से आशा संगिनी का हुआ प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। दस्तक अभियान के तहत कालाजार के एक्टिव केस डिटेक्शन (एसीडी) अभियान की सफलता के लिए बनकटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आशा संगिनियों को प्रशिक्षित किया गया। डब्ल्यूएचओ के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ सागर घोड़ेकर ने कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कालाजार के एक्टिव केस डिटेक्शन अभियान को सफल बनाने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर कालाजार के सक्रिय मरीज भी ढूंढेंगी।
कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कालाजार के अभियान के जरिये जो भी संभावित मरीज ढूंढे जाएंगे उनकी कालाजार की आरके-39 जांच के अलावा टीबी और एचआईवी जांच भी कराएंगी। कालाजार उन्मूलन में बीमारी की समय से पहचान और अतिशीघ्र इलाज का अहम योगदान होता है। समय से इलाज न मिलने पर अधिकांश मामलों में मृत्यु का खतरा रहता है। अगर किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय से बुखार आ रहा हो, पेट में सूजन हो, वजन कम हो रहा हो और भूख में कमी जैसे लक्षण हैं तो वह कालाजार का संभावित मरीज हो सकता है। एसीडी के दौरान ऐसे संभावित मरीजों को सीएचसी-पीएचसी और जिला अस्पताल भेज कर आरके-39 जांच करवानी है। जांच में कालाजार की पुष्टि होने पर 48 घंटे के भीतर इलाज शुरू कर देना है। चर्म रोग संबंधित कालाजार मरीजों में केस हिस्ट्री पर भी नजर रखनी है। इस कालाजार का प्रमुख लक्षण शरीर में सफेद दाग, चकत्ते और गांठें हैं। वीबीडी परामर्शदाता डॉ. एसके पाण्डेय ने कहा आशा कार्यकर्ता दस्तक अभियान के दौरान इन लक्षण वाले मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए प्रयास करेंगी और ऐसे मरीजों की रिपोर्टिंग ब्लॉक पर करेंगी। प्रशिक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. मनीष कुमार, मलेरिया इंस्पेक्टर ताज मोहम्मद, आशा संगिनी ममता, मालती, अंजना सिंह, शशि रेखा, गीता, सरोज, शकुंतला, सविता अनीता, सुशीला सहित अन्य आशा संगिनी मौजूद रहीं।