मत्स्य संपदा योजना : अपात्रों को बनाया जा रहा था पात्र
देवरिया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की सीडीओ ने जांच कराई तो विभागीय गड़बड़ी उजागर हो गई। इसमें 11 लोगों को अपात्र घोषित कर दिया गया। सीडीओ ने विभागीय अधिकारियों पर नाराजगी जताई है। सीडीओ अगर इसका सत्यापन नहीं कराते तो अपात्रों को पात्र बनाकर उन तक योजना का लाभ पहुंच गया होता।
वित्तीय वर्ष 2020-21 प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत निजी भूमि पर मत्स्य पालन के लिए तालाब निर्माण के लिए 60 लोगों, प्रथम वर्ष निवेश मेजर कार्य के लिए नौ, प्रथम वर्ष निवेश पंगेशियस के लिए पांच, रियरिंग यूनिट पर तालाब निर्माण के लिए चार, मत्स्य बीज हैचरी निर्माण के लिए दो, वृहद बायो फ्लाक 50 टैंक के लिए एक, बायोफ्लाक निर्माण सर्वधन प्रथम वर्ष निवेश के लिए 24, मत्स्य आहार मिल, प्लांट के लिए एक-एक, बाइक विथ आइसबाक्स के लिए 22 सहित तकरीबन 159 विभिन्न योजनाओं के पात्रों की सूची तैयार कर मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने मुख्य विकास अधिकारी को भेजा। प्रस्ताव पर सीडीओ, जिला कृषि अधिकारी, अधिशासी अभियंता सिंचाई, उपायुक्त मनरेगा, परियोजना निदेेशक डीआरडीए, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य, प्रभारी कृषि ज्ञान केंद्र, डीएम और प्रबंधक जिला अग्रणी बैंक सहित अधिकारियों के हस्ताक्षर भी हो गए। विभागीय अधिकारियों ने बिना किसी सत्यापन के लिए इसे स्वीकृति के लिए भेज दिया, लेकिन सीडीओ को पात्रों की सूची पर संदेह हुआ तो उन्होंने सूची के पात्रता का सत्यापन करा दिया। जिसमें 11 लोग अपात्र पाएं गए हैं। ऐसे में लाखों का गोलमाल होने से बच गया।
योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन हुए थे। 159 आवेदन आएं थे। जिसे सूचीबद्ध कर भेजा गया। इसके लिए अभी बजट नहीं आया है। सीडीओ के सत्यापन में 11 अपात्र पाए गए हैं।
नंद किशोर प्रसाद, मुख्य कार्यकारी अधिकारी
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों का विकास खंड स्तर पर सत्यापन कराया गया तो गड़बड़ी सामने आई है। 11 ऐसे पात्र पाए गए जो अपात्र थे। इसके लिए विभागीय अधिकारियों का स्पष्टीकरण मांगा गया है।
शिव शरणप्पा जीएन, मुख्य विकास अधिकारी