ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार जटाशंकर द्विवेदी की जीत को ऐतिहासिक माना जा रहा है। यहां 54 साल बाद सत्ताधारी दल को प्रमुख पद से हाथ धोना पड़ा है। वहीं, ब्लॉक प्रमुख चुनाव के इतिहास में पहली बार ब्राह्मण नेता के सिर जीत का सेहरा बंधा है। इस जीत के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। जटाशंकर की जीत को भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव की सफलता से जोड़ कर देखने लगी है।
रुद्रपुर के ब्लॉक प्रमुख चुनाव के इतिहास पर नजर डाली जाए तो यहां पहले आम चुनाव से ही प्रमुख पद की चाबी सत्ता धारी दल के हाथ में रही। वर्ष-1962 में सत्ताधारी दल कांग्रेस के समर्थन से कन्हौली के शंकर्षण सिंह पहले ब्लॉक प्रमुख बने। 1972 के चुनाव में कांग्रेस के गोरखनाथ यादव प्रमुख बने।
वहीं, सत्ताधारी दल के समर्थन से कांग्रेस के रमाशंकर यादव रुद्रपुर में दो बार ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीते। वर्ष-1996 में सुरक्षित सीट पर सत्ताधारी दल भाजपा के समर्थन से बदामी देवी रुद्रपुर की ब्लॉक प्रमुख बनी। 2001 में भाजपा उम्मीदवार ऊषा पासवान के सिर जीत का सेहरा बंधा उस समय सूबे में भाजपा की सरकार थी।
वर्ष -2007 में सपा के टिकट पर सुरेंद्र प्रताप सिंह ब्लॉक प्रमुख बने तो 2012 में सत्ताधारी दल के विधायक सुरेश तिवारी ने भरत यादव को प्रमुख बनवाया। पहली बार सूबे में सपा की सरकार होने के बाद भाजपा अपना प्रत्याशी जीताने में कामयाब रही। जिले में जटाशंकर द्विवेदी की जीत को भाजपाई बड़ी सफलता मान रहे हैं।
इस बाबत भाजपा के रुद्रप़ुर ब्लॉक के चुनाव प्रभारी डॉ. अजय मणि त्रिपाठी ने कहा कि रुद्रपुर में भाजपा ने किला फतह किया है। यह जीत आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का संदेश है।