हड़ताल पर रहे आईएमए के चिकित्सक, सौंपा ज्ञापन
देवरिया। आयुर्वेद चिकित्सकों को सरकार की ओर से 39 तरह की सर्जरी की इजाजत दिए जाने के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सदस्य शुक्रवार को हड़ताल पर रहे और ओपीडी बंद रखा। सीएमओ कार्यालय परिसर में प्रदर्शन कर धरना दिया और मांगों से संबंधित चार सूत्रीय ज्ञापन एडीएम प्रशासन राकेश पटेल को सौंपा।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन व इंडियन डेंटल एसोसिएशन के सदस्य ओपीडी की सेवा बंद कर सीएमओ कार्यालय परिसर में एकत्र हुए। चिकित्सकों ने कहा कि सरकार के निर्णय से चिकित्सा पद्धति आपस में मिक्स हो जाएगी, इससे चिकित्सा पद्धति की गुणवत्ता प्रभावित होगी। आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी करने की छूट देना नीट जैसी परीक्षा को महत्वहीन करना है। सर्जरी में छूट देना मार्डन चिकित्सा पद्धति में कई वर्षों की ट्रेनिंग शिक्षा व अनुभव की अनदेखी है, यह समाज के लिए घातक हो सकता है। उन्होंने इसे वापस लेने की मांग की गई। इसके बाद संगठन के अध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र तिवारी, सचिव डॉ. अविनाश सिंह, पूर्व प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. विपिन बिहारी शुक्ल के नेतृत्व में चिकित्सक कलेक्ट्रेट पहुंच ज्ञापन सौंपे।
इस दौरान डॉ. अरविंद मिश्रा, डॉ. अनिरूद्ध सिंह, डॉ. वीके शर्मा, डॉ. सुबाष गुप्ता, डॉ. एजाज अहमद, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. नितेश राय, डॉ. आरपी शाही, डॉ. मो. आरिफ, डॉ. संतोष आनंद, डॉ. अविनाश चौरसिया, डॉ. एचसी अरोरा, डॉ.तौकीर आजम, डॉ. केएम त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी के अधिकार का विरोध आत्मघाती: डा.वीवी तिवारी
सलेमपुर। प्राइवेट मेडिकल प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के महामंत्री डॉ. वीवी तिवारी ने अपने कैंप कार्यालय पर शुक्रवार को पत्रकारों से वार्ता में कहा कि आयुर्वेद चिकित्सकों को मिले सर्जरी के अधिकार का आईएमए विरोध कर रहा है। यह उसके लिए आत्मघाती सिद्ध होगा। एलोपैथी चिकित्सकों ने चिकित्सा सेवा को व्यवसाय बनाकर बदनाम कर दिया है, जिससे समाज में चिकित्सकों की नि:स्वार्थ सेवाभाव से मिले दूसरे भगवान का दर्जा आज कलंकित हो गया है। आयुर्वेद चिकित्सकों को कानून बनाकर विभिन्न रोगों में जनरल सर्जरी करने का अधिकार देकर चिकित्सा की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी, आयुष मंत्री श्रीपद येशो नाईक सहित टीम को बधाई देते हुए कहा कि इससे लोगों को सस्ती और सुलभ चिकित्सा उनके नजदीक ही मिलेगी। कहा कि आयुर्वेद मनीषियों के नि:स्वार्थ चिकित्सा सेवा के कारण ही समाज में चिकित्सकों को दूसरे भगवान का दर्जा मिला हुआ है। आयुष चिकित्सक विरासत को आज भी संजोए हुए है, लेकिन एलोपैथी चिकित्सकों के धनलोलुपता ने चिकित्सा सेवा को व्यवसाय और लापरवाह बनाकर रख दिया है, जिससे चिकित्सकों के कार्य को उपभोक्ता फोरम में कानून बनाकर ला दिया गया। यही नहीं एलोपैथी चिकित्सकों की चिकित्सा आम जनमानस की पहुंच से दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि आईएमए के बंद को देखते हुए एसोसिएशन के आयुर्वेद यूनानी चिकित्सक आज के दिन अपने क्लीनिक पर नि:शुल्क चिकित्सा सेवा देने का कार्य कर रहे हैं।