सौ से अधिक महिलाओं ने दिखाया था जल जौहर, आज भी सती पूजन से शुरू होता है मांगलिक कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। आजादी की लड़ाई में पैना का कुर्बानियों भरा इतिहास है। अंग्रेजों से लड़ाई के दौरान सौ से अधिक महिलाओं ने जल जौहर दिखाया था। 1857 की क्रांति में लोगों ने तिरंगा फहराते हुए गांव को आजाद घोषित कर दिया था। पैना को आज भी शहीदों के गांव के नाम से जाना जाता है।
मंगल पांडेय के नेतृत्व में 1857 की क्रांति में पैना के लोगों का बलिदान आज भी विस्मरणीय है। आजादी की लड़ाई में यहां के 395 लोगों ने शहादत दिया था। इनमें आठ लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई थी, मगर अंग्रेज उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सके थे। लोगों के अनुसार, जलमार्ग के रास्ते ले जाए जा रहे अंग्रेजी खजाने को गांव के रणबांकुरों ने लूट लिया था।
इससे खार खाए अंग्रेजी सेना ने गांव को चारों तरफ से घेर लिया था। अंग्रेजों का लोगों ने मुंहतोड़ जवाब दिया था। यह भी बताया जाता है कि सौ से अधिक महिलाओं को जबरदस्ती पानी के जहाज से अपने साथ ले जाने का प्रयास किए थे। महिलाओं ने साहस का परिचय देते हुए एकजुट होकर जौहर दिखाते हुए एक तरफ हो गईं। इससे जहाज डगमगाते हुए डूब गई थी। इसमें अंग्रेजों काे भारी क्षति हुई थी।
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ठाकुर सिंह के पलटन से थर-थर कांपते थे अंग्रेज
पैना गांव निवासी और क्रांतिकारी ठाकुर सिंह के पलटन से अंग्रेज थर-थर कांपते थे। मंगल पांडेय के नेतृत्व में 1857 की क्रांति में ठाकुर सिंह की पलटन ने अंग्रेजों से खजाना लूट लिया था।
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शहादत पर एक नजर...
31 जुलाई को 85 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे।
100 से अधिक महिलाओं ने उफनाती सरयू में अंग्रेजों का जहाज डुबोते हुए जौहर दिखाया था।
अंग्रेजों द्वारा गांव को चारों ओर से घेरकर जलाने के बाद 200 से अधिक वृद्ध, बच्चे और महिलायें शहीद हुई थीं।
26 दिसंबर 1857 को बिहार प्रांत के मैरवां, मझौली और दरौली के गोरिल्ला युद्ध में ठाकुर सिंह की पलटन सहित 10 लोग शहीद हुए थे।
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शहादत दिवस आज
बरहज। पैना गांव स्थित शहीद स्मारक पर 31 जुलाई को शहीदों की याद में प्रत्येक वर्ष की भांति मेले का आयोजन किया गया है। इसमें अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।