फर्जी शिक्षकों के वेतन भुगतान में भी दिखाई थी तेजी
लेखा विभाग के बाबुओं को हर माह चढ़ावा चढ़ाते रहे हैं फर्जी शिक्षक
मामला उजागर होने के बाद इनकी कार्यप्रणाली को लेकर तेज हुईं चर्चाएं
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बीएसए कार्यालय में लेखा विभाग के बाबू भी किसी से कम नहीं हैं। सामान्य काम के लिए भी शिक्षकों को कई दिनों तक दौड़ाने वाले यहां के बाबुओं ने फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी पाए शिक्षकों को वेतन भुगतान में खूब तेजी दिखाई थी। वर्षों से एक ही पटल पर जमे इन बाबुओं की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
फर्जी शिक्षकों के मामले में चर्चा में आए बीएसए कार्यालय के दो चर्चित बाबुओं के अलावा बगल के लेखा विभाग में भी दो बाबुओं के कारनामों की विभाग में खूब चर्चा है। अपनी पहुंच और प्रभाव के कारण एक बाबू तबादले के बाद भी यहीं जमा है तो दूसरा भी सेटिंग के खेल में आगे है। इनकी शान शौकत अफसरों जैसी ही है। वर्ष 2014 से 2016 के दौरान फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे जितने शिक्षकों को नौकरी मिली, इनके भुगतान भी इन्हीं दोनों के पटल से हुए हैं। खास बात है कि इन शिक्षकों का भुगतान करने में इन्होंने जरा भी देरी नहीं दिखाई। फर्जीवाड़े का पता होने के बाद भी मौन साधे रहे। फर्जी शिक्षक अपने वेतन का एक निर्धारित हिस्सा इन्हें हर माह चढ़ाते रहे हैं। इस संबंध में वित्त व लेखाधिकारी जगदीश श्रीवास्तव ने बताया कि बाबुओं के खिलाफ अगर कोई लिखित शिकायत करेगा तो उसकी जांच कराई जाएगी। वर्ष 2014 से 2016 तक हुई नियुक्तियों के दौरान कुछ शिक्षकों को वेतन जल्द जारी होने के बारे में वह शुक्रवार को ही बता पाएंगे।
लेखा विभाग में कार्य कराने को सबसे अधिक दौड़ते हैं शिक्षक
प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि लेखा विभाग कार्यालय में विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए आएदिन शिक्षक दौड़ते रहते हैं। संगठन की ओर से भी अधिकारियों व बाबुओं पर दबाव डालना पड़ता है। लेकिन इसके बावजूद कार्यों का संपूर्ण निदान नहीं होता। उधर, सेवानिवृत्त प्राथमिक शिक्षक कल्याण संघ के अध्यक्ष शार्दूल सिंह ने बताया कि अभी भी सैकड़ों सेवानिवृत्त शिक्षकों का पेंशन पुनरीक्षण कार्य बकाया है। पुनरीक्षण कार्य के बाद भुगतान करने में लेखा विभाग के दोनों बाबू भी पेंशनधारकों को खूब दौड़ाते हैं। संगठन इनकी कारगुजारियों व लेखा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुका है। बचे हुए शिक्षकों का पेंशन पुनरीक्षण कार्य जल्द पूरा नहीं किया गया तो संगठन इस मुद्दे को लेकर डीएम से मिलेगा।
अनुदानित प्राथमिक विद्यालयों की नियुक्ति में भी खेल
शिक्षकों की भर्ती में खेल सिर्फ परिषदीय विद्यालयों में ही नहीं है। अनुदानित प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है। सलेमपुर के एक विद्यालय की जांच में धांधली उजागर भी हो चुकी है। इसमें एक दर्जन शिक्षक-कर्मचारियों केे साथ कार्यालय के अधिकारी भी लपेटे में आए थे। सूत्रों के मुताबिक अनुदानित विद्यालयों में बीएसए कार्यालय की मिलीभगत से चहेतों को नौकरी दिलाई गई है। इनमें कई के बीएड, बीटीसी और टीईटी के प्रमाण पत्र इन जालसाजों की मदद से ही तैयार कराए गए हैं।