गौरीबाजार। कैश की किल्लत से हालात खराब होते जा रहे हैं। कई दिनों से लाइन लगाने वाली जनता गुरुवार को सड़क पर उतर आई। सुबह एसबीआई ने नो कैश का जैसे ही बोर्ड लगाया, ग्राहक हंगामा करने लगे। पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई। तीन घंटे तक गोरखपुर-देवरिया, रुद्रपुर और हाटा रोड ठप हो गया।
बैंक का चैनल तोड़ने की कोशिश की गई। पुलिस की सतर्कता से बड़ी घटना टल गई। बेकाबू भीड़ को समझाने में पुलिस के पसीने छूट गए। उग्र भीड़ ने पुलिसकर्मियों को धक्का दे दिया। गौरीबाजार में एसबीआई, पीएनबी, इंडिया बैंक, यूनियन बैंक की शाखा हैं। सेंट्रल बैंक की गौरीबाजार, इंदूपुर और सिरजम और चरियावं मेेें उप शाखा है। ग्रामीण बैंक की इंदूपुर, खरोह और गौरीबाजार में शाखा है। हाटा रोड पर कोआपरेटिव बैंक है।
नोट बंदी के बाद इन बैंकों में कैश क्राइसिस का हवाला दिया जा रहा है।
लाइन में लगने के बाद दो से चार हजार रुपये का भुगतान हो रहा हैं। गुरुवार भोर से रामपुर गौरीबाजार एसबीआई की शाखा पर महिलाएं और पुरुष रकम के लिए लाइन में लगे थे। साढ़े नौ बजे के करीब बैंक के बाहर नौ कैश की नोटिस चस्पा की गई। ग्राहक भड़क गए और नारेबाजी करते हुए गौरीबाजार चौराहे पर जाम लगा दिया। गोरखपुर-देवरिया, रुद्रपुर-हाटा रोड ठप हो गया।
ग्राहकों का आरोप था कि बैंक के कर्मचारी चहेतों को रुपये उपलब्ध करा रहे हैं। जनता लाइन में खड़ी होकर नंबर का इंतजार करती है। एसबीआई के कर्मचारी धांधली कर रहे हैं। जाम के दौरान कुछ लोगों ने निकलने का प्रयास किया तो लोग हाथापाई पर उतर आए। इसका शिकार एक पुलिसकर्मी भी हुआ। बाइक से ड्यूटी जा रहे पुलिसकर्मी से धक्कामुक्की हुई।
सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर डीपी सिंह फोर्स के साथ पहुंचे और भीड़ को समझाने की कोशिश करने लगे। बेकाबू भीड़ बात सुनने को तैयार नहीं थी। हालात बिगड़ता देख पुलिस ने सख्ती बरतने की कोशिश की तो भीड़ बैंकफéट पर हो गई। कुछ लोग बैंक पर पहुंचे और रुपये की मांग करने लगे। लेकिन शुक्रवार को कैश दिए जाने की सूचना जैसे की पता चला, जनता फिर से सड़क पर आ गई।
करीब तीन घंटे तक जोर आजमाइश होती रही। कैश क्राइसिस के कारण जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा। करीब तीन घंटे बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई। पुलिस ने यातायात को बहाल कराया।