संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। मुख्य चौक पर आजादी से एक दिन पहले पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल ने तिरंगा फहराकर नगर क्षेत्र को आजाद घोषित करा दिया था। इससे खार खाए अंग्रेजों की गोली से दोनों रणबांकुरों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
जनता के उग्र हो जाने पर अंग्रेजों को मैदान छोड़कर भागना पड़ा था। लोगों के अनुसार, गोली लगने के बाद भी दोनों अमर शहीदों ने तिरंगे के आन-बान-शान को झुकने नहीं दिया। अमर शहीदों के कारनामों की चर्चे नगर क्षेत्र के लोगों का सीना आज भी गर्व से चौड़ा कर देते हैं।
शहीद पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल अंग्रेजी सैनिकों को चकमा देकर भीड़ को चीरते हुए मुख्य चौक पर पहुंच गए थे। लोगों के अनुसार, दोनों ने चौक पर तिरंगा फहरा दिया। झंडा फहरते ही गोलियाें की तड़तड़ाहट गूंज उठी। खून से लथपथ होने के बाद भी दोनों ने तिरंगा को झुकने नहीं दिया था।
सरयू नदी में विलीन कुरह परसियां निवासी और अमर शहीद पंडित विश्वनाथ मिश्र, जबकि बरौली गांव के जगन्नाथ मल्ल 25 वर्ष की आयु में अंग्रेज कैप्टन मूर की गोली लगने से शहीद हो गए थे। बताया जाता है कि गोली चलते ही भीड़ उग्र हो गई।
जो कैप्टन मूर को दौड़ा ली। सैनिकों और कैप्टन मूर को किसी तरह जान बचाकर भागना पड़ा था। अमर शहीद विश्वनाथ मिश्र के भतीजा श्यामबिहारी मिश्र बताते हैं कि स्व.लक्ष्मी मिश्र के तीन संतानों में पंडित विश्वनाथ मिश्र तीसरे नंबर के थे।