तरकुलवा। माइक्रो फाइनेंस कंपनियां सिधावे धर्मागतपट्टी गांव की महिलाओं को लोन के मकड़जाल में इस कदर फांस चुकी हैं कि उनका जीना मुहाल हो चुका है। कुछ महिलाओं को एक साथ दस-बारह कंपनियों ने लोन दे दिया है। उनसे 25-28 प्रतिशत ब्याज वसूला जा रहा है। कभी मजबूरी में किस्त जमा नहीं हो पाता है तो वसूली करने वाले रात में घरों में घुस जाते हैं, अभद्रता कर जाते हैं। इनके डर से महिलाएं खेत-बारी, गहने आदि बेंचकर किस्त चुकाने को विवश होना पड़ रहा है। इनकी प्रताड़ना से आयशा खातून व विंदू देवी हार्ट अटैक से जान गवां चुकी हैं। सिधावें धर्मागतपट्टी की गुड्डी देवी पत्नी मेल्हू गोंड के पास केवल पांच कट्ठा जमीन था, जो बंधक है। वह बताती हैं कि फर्जी कागजात बनाकर माइक्रो कंपनी ने उनके नाम से 1,40,000 का एक, 70,000 का दो, 50,000 का एक लोन है। इसी गांव की रूबी देवी पत्नी राजेंद्र चौहान ने बताया कि कई फाइनेंस कंपनियों ने फर्जी कागजात बनाकर उनके नाम से 14 लोन करा दिया है। जिसमें दो लोन जमा कर दी हूं।
कम ब्याज दर पर लोन देने की बात कही थी, लेकिन अब 29 प्रतिशत ब्याज वसूला जा रहा है। आशा देवी ने बताया कि उनके नाम से नौ लोन है। लोन करते समय कंपनी के एजेंटों ने घूस के पांच हजार और तीन हजार प्रोसेसिंग चार्ज लिया था। ललिता देवी पत्नी राम बली ने कहा कि रुपया 1,40,000 लोन लिया। कंपनी के एजेंट ने तीन हजार रुपए काट लिया। किस्त जमा करती हूं, लेकिन उसे एजेंट पासबुक पर नहीं चढ़ाते हैं। उनका आरोप था कि एजेंटों ने बहू सुमन देवी व रीता देवी को फर्जी कागजात बनाकर 50-50 हजार के दो-दो लोन करा दिया। रीता देवी का कहना था कि आरबीएल प्राइवेट फाइनेंस कंपनी ने उनका पचास-पचास हजार का दो लोन किया है। लेकिन पॉसबुक नहीं दिया है। घर का सारा गहना बिक गया, खेत बंधक है। लेकिन लोन बेबाक नहीं हुआ है।