देवरिया। छोटी गंडक नदी के पश्चिम तरफ स्थित तरकुलवा क्षेत्र के तवक्कलपुर गांव में बृहस्पतिवार की सुबह चीख पुकार के साथ हुई। सुबह करीब छह बजे ही गांव के दाऊद, अमित, राहुल और संजू के घर में उनकी मौत की खबर आई। चारों युवक अपने-अपने घर के कमाने वाले सदस्य थे। इन पर खुद के साथ ही मां-बाप, भाई-बहन की भी जिम्मेदारी थी, लेकिन बंद कमरे में फैले अंगीठी के धुएं ने इन चारों के घरों में कभी न छंटने वाला अंधेरा भर दिया।
तवक्कलपुर गांव के रहने वाले अमित कुमार बरनवाल (24) पुत्र अयोध्या चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे। इसके दो बच्चे हैं। मां-बाप के सपनों को पूरा करने के लिए अमित ने बेल्डर का काम सीखा था। एक बहन की शादी हो गई है, दूसरी बहन की शादी की तैयारी थी।
अमित को विदेश में नौकरी मिल गई थी, जिसके बाद सभी खुशहाली के सपने बुनने लगे थे। घरवालों ने बताया कि रात में फोन पर बात हुई थी। सुबह ही जिम्बाब्वे जाने के लिए दिल्ली के लिए रवाना होना था। किसे पता था कि सुबह पहली कॉल में मौत की सूचना आ जाएगी।
इसी टोले के रहने वाले संजू सिंह (24) पुत्र फतेह बहादुर सिंह दो भाइयों में बड़े थे। अभी इनकी शादी भी नहीं हुई थी। घर के खर्च से लेकर पढ़ाई तक का सारा जिम्मा संजू पर ही था। कानपुर में नौकरी मिलने के बाद घरवाले खुशी से झूम रहे थे। संबू भी विदेश जाने की तैयारी में थे। हादसे ने इस घर की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया। शादी की खुशियां गम में बदली दाऊद अंसारी (25) पुत्र यासीन भी दो भाइयों में बड़े थे। दाऊद की बेटी आयत अभी एक साल की है। दिसंबर में बहन की शादी है, जिसके लिए खर्च जुटाने की जिम्मेदारी भी इसी नौजवान के कंधे पर थी।
मां-बाप इस उम्मीद में थे कि 22 नवंबर को जब वह घर आएगा तो शादी की बाकी तैयारियों को पूरा कराएगा, लेकिन हादसे ने न केवल मां-बाप की उम्मीद, बल्कि बहन की खुशियां भी छीन लीं। बेटी आयत को देखकर हर आंख भर जा रही थी।
इकलौता बेटा था राहुल : राहुल सिंह (23) पुत्र लल्लन सिंह मां-बाप का दुलारा था। दो बहनों में से एक की शादी हो गई थी और दूसरे की शादी के लिए परिवार तैयारी में जुटा था। परिवार का खर्च, शादी का खर्च सब कुछ राहुल के जिम्मे ही था।
घरवाले खुश थे कि उसे कानपुर में नौकरी मिल गई है, अब जल्द ही सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
उन्हें इस बात का एहसास ही नहीं रहा होगा कि बृहस्पतिवार की सुबह इतना मनहूस होगी। अब पूरा जीवन मां-बाप को केवल राहुल की यादों के सहारे ही काटना है।
शुक्रवार सुबह होगा अंतिम संस्कार, रात में ही हो गई तैयारी
गांव के चार नौजवानों की मौत की खबर से पूरा गांव रो रहा है। बृहस्पतिवार को पूरे दिन किसी के घर का चूल्हा नहीं जला। गांव के तमाम लोग शव लेने कानपुर गए हैं। गांव में मौजूद दयानंद सिंह, मणि, राजेश, शिवशंकर आदि ने बताया कि छोटी गंडक नदी के किनारे शुक्रवार की सुबह शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
इसके लिए पहले से ही सारी तैयारी की जा रही है।