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Deoria News: गर्भवती की पिटाई से मौत के आरोप में चार आरोपी गिरफ्तार

Wed, 16 Sep 2026 12:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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गौरी बाजार/देवरिया। बंटवारे के विवाद में मारपीट से घायल गर्भवती जगवंती देवी की मौत के मामले में गौरी बाजार पुलिस ने मंगरवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सुरेंद्र निषाद, राजू निषाद उर्फ गोलू, देवमती देवी और आंचल को लंगड़ी चौराहे के पास से दबोचा गया। आरोपी राजू के पास से जगवंती का छीना गया एंड्रॉयड मोबाइल भी बरामद हुआ है। मामले में छह लोगों पर प्राथमिकी दर्ज थी। महिला की मौत के बाद पुलिस ने हत्या की धारा बढ़ाई है।
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बर्दगोनिया निवासी 40 वर्षीय जगवंती देवी के पति गोविंद निषाद दुबई में रहते हैं। पारिवारिक विवाद के कारण जगवंती ससुराल से अलग भृगुसरी में मकान बनवाकर रह रही थीं। जगवंती की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के मुताबिक, ससुराल में हिस्से-बंटवारे को लेकर कुछ समय से तनाव चल रहा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि करीब तीन माह पहले ससुर सुरेंद्र ने मोबाइल पर जान से मारने की धमकी दी थी और इसकी सूचना स्थानीय थाने को दी गई थी।
प्राथमिकी के मुताबिक 12 सितंबर की शाम करीब पांच बजे जगवंती अपने भतीजे के साथ बर्दगोनिया स्थित घर गई थीं। आरोप है कि वहां सुरेंद्र, देवमती देवी, आंचल और अमित ने गाली-गलौज की। विरोध करने पर जगवंती और उनके भतीजे की लात-मुक्कों और डंडों से पिटाई की गई।
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जगवंती ने शिकायत में अपने को गर्भवती बताते हुए पेट में दर्द होने की बात भी लिखी थी। अगले दिन समझौते के लिए बुलाए जाने के दौरान दोबारा मारपीट का आरोप लगाया गया। घटना का वीडियो बनाने के दौरान गोलू पर जगवंती का मोबाइल लेकर भागने का आरोप था।
गौरी बाजार थाने में जगवंती की लिखित शिकायत पर 13 सितंबर को शाम प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसमें सुरेंद्र, देवमती देवी, आंचल, अमित, गोलू और जग्गू को नामजद किया गया था। पुलिस के मुताबिक मारपीट में गंभीर रूप से घायल जगवंती को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज देवरिया ले जाया गया था। हालत गंभीर होने पर गोरखपुर रेफर किया गया। बाद में उनकी मौत हो गई।
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तीन माह पहले धमकी की शिकायत, फिर भी नहीं थमा विवाद
- जगवंती ने अपनी शिकायत में साफ लिखा था कि हिस्से-बंटवारे को लेकर ससुराल से विवाद चल रहा है। करीब तीन माह पहले ससुर पर मोबाइल से जान से मारने की धमकी देने और इसकी सूचना स्थानीय थाने को देने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद 12 सितंबर को फिर विवाद और मारपीट हुई। अगले दिन समझौते के लिए बुलाए जाने के दौरान दोबारा मारपीट का आरोप सामने आया। ऐसे में पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट होना है कि तीन माह पहले दी गई सूचना पर क्या कार्रवाई हुई थी।
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