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ऐसे तो साल भर में भी नहीं बन पाएगा पटरी व्यवसायियों का स्मार्ट कार्ड

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बसियवां पार्क में पटरी व्यवयाइयों ने बैठक कर नगर पालिका प्रशासन के उत्पीड़न के विरोध में आंदोलन ? - फोटो : DEORIA
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तीन माह में महज 2144 फुटपाथ व्यवसायियों का चिह्नांकन
ऐसे तो साल भर में भी नहीं बन पाएगा पटरी व्यवसायियों का स्मार्ट कार्ड
शहर में पांच हजार से अधिक है पटरी व्यवसाइयों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। मुख्यमंत्री ने भले ही पथ विक्रेताओं को पुनर्वास, पेंशन, सुरक्षा सहित अन्य सुविधा देने की घोषणा की हो लेकिन जिम्मेदारों की सुस्ती सीएम की मंशा पर पानी फेरने के लिए काफी है। तीन माह पहले जिस संस्था को बायोमैट्रिक सिस्टम से फुटपाथ व्यापारियों का स्मार्ट कार्ड बनाने का जिम्मा सौंपा गया, वह लक्ष्य से आधे पर ही सिमटी है। करीब पांच हजार पटरी व्यवसायियों में से महज 2144 का ही अबतक स्मार्ट कार्ड बन पाया है। चिह्नांकन का काम पूरा न हो पाने के चलते इन्हें सुव्यवस्थित करने का सरकारी आदेश खटाई में पड़ता दिखाई दे रहा है।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में भारत सरकार के पथ विक्रेता जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन अधिनियम 2014 के अधीन प्रदेश पथ विक्रेता नियमावली लागू की। इसके तहत पथ विक्रेताओं को चिह्नित करते हुए उन्हें स्मार्ट कार्ड दिए जाने की व्यवस्था लागू की गई। नगर निकायों को पथ विक्रय समिति गठित कर फुटपाथ व्यवसायियों के अधिकारों को संरक्षित करने के निर्देश दिए गए। दो साल इंतजार के बाद अपने अधिकारों की मांग को लेकर जब पटरी व्यवसायी सड़क पर उतरे तो नगर पालिका ने आनन-फानन पथ विक्रय समिति गठित की। इसकी बैठक आज तक नहीं हो पाई है। पटरी व्यवसायियों के चिह्नांकन व उन्हें स्मार्ट कार्ड देने का जिम्मा केडीएस नामक संस्था को मिला है। जो तीन माह में अब तक काम पूरा नहीं कर पाई है। तीन हजार से अधिक व्यवसायियों का आंकड़ा अब तक विभाग को नहीं मिल पाया है। विभाग का कहना है कि सभी पटरी विक्रेताओं का डाटा उपलब्ध होने के बाद ही इन्हें जगह उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सकेगा।
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अब तक चिह्नित पथ विक्रेताओं का आंकड़ा
1558 स्थायी पथ विक्रेता
583 अस्थायी पथ विक्रेता
तीन साप्ताहिक पथ विक्रेता
स्मार्ट कार्ड के लिए रखने होंगे मोबाइल व आधार
शहरी क्षेत्र में पटरी पर दुकान लगाने, ठेला-खोमचा वाले दुकानदारों का सर्वे किया जाना है। स्मार्ट कार्ड पाने के लिए उन्हें अपने पास आधार कार्ड व मोबाइल रखना होगा। सर्वे के काम में लगे केडीएस संस्था के कर्मचारी बायोमैट्रिक सिस्टम से दुकानदारों का स्मार्ट कार्ड बना रहे हैं।
वर्जन
डूडा या नगर पालिका से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाने के कारण पटरी विक्रेताओं को चिह्नित करने व स्मार्ट कार्ड बनाने में दिक्कत हो रही है। तमाम दुकानदार आधार कार्ड देने से गुरेज कर रहे हैं। डूडा से मदद की अपील की गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
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-सत्येंद्र शाही, जिला प्रोजेक्ट हेड केडीएस।
सर्वे करने व स्मार्ट कार्ड बनाने की जिम्मेदारी केडीएस नामक संस्था को दी गई है। अगर किसी प्रकार की दिक्कत है तो उसका समाधान कराया जाएगा।
- प्रमोद कुमार यादव, पीओ डूडा।
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पथ विक्रेताओं ने नगर पालिका पर लगाया उत्पीड़न का आरोप
देवरिया। जिला फुटपाथ एवं पटरी व्यवसायी सेवा समिति की बैठक रविवार को पोस्टमार्टम चौराहा स्थित बसियवां पार्क में हुई। व्यवसायियों ने जिला प्रशासन की ओर से हटाए जा रहे अतिक्रमण पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई गई। समिति के संरक्षक मंटू बाबू जायसवाल ने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री पथ विक्रेताओं के पुनर्वास व सुरक्षा की बात कर रहे हैं दूसरी ओर नगर प्रशासन अतिक्रमण हटाने के नाम पर फुटपाथ व्यवसायियों का उत्पीड़न कर रहा है। इस प्रकार की कार्रवाई बंद नहीं हुई तो जल्द ही बड़ा आंदोलन किया जाएगा। जीविकोपार्जन में लगे व्यवसायियों की रोजी-रोटी पर नगर पालिका बलपूर्वक जेसीबी चलवा रही है। हम इस अन्याय को अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। जिलाध्यक्ष अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि जगह दिए बिना हमें हमारे स्थान से कोई नहीं हटा सकता। इस दौरान तारकेश्वर गुप्ता, सत्यप्रकाश, नंदलाल, राजेश, विनोद, राजू सोनकर आदि मौजूद रहे।
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