बरहज। सरयू और राप्ती में आई बाढ़ से परसियां-विशुनपुर देवार के करीब एक दर्जन मजरों तक नदी का पानी पहुंच गया है। वहीं भदिला प्रथम गांव टापू बना हुआ है। तीन दिन से दोनों नदियों का जलस्तर घट रहा है। रोजाना सरयू और राप्ती करीब पांच-पांच सेमी पीछे हट रही हैं। नदियों के पीछे हटने के बावजूद बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की सांसत बरकरार है। वहीं मवेशियों के लिए चारा का संकट का गहरा गया है।
सरयू का जलस्तर इस वर्ष खतरे के निशान 66.50 से एक मीटर पांच सेमी ऊपर उच्चतम 67.55 मीटर तक पहुंच गया था। इससे तटवर्ती गांवों में खलबली मच गई थी। नदी का पानी विशुनपुर देवार के बांके टोला, जरलहवा, स्कूलहिया, कत्लहिया, अनुसूचित बस्ती सहित करीब एक दर्जन मजरों तक पहुंंच गया था।
करीब डेढ़ माह से भदिला प्रथम गांव चारों ओर से राप्ती नदी के पानी से घिरा हुआ है। नदियों के पीछे हटने के बाद भी सांसत बनी हुई है। जलभराव वाली जगहों से दुर्गंध उठने के साथ लोगों को संक्रामक बीमारियों का भय सताने लगा है। विशुनपुर देवार के ओमप्रकाश यादव, दिनेश कुमार, रमाशंकर यादव प्रमोद, संतोष, दुर्गेश यादव आदि का कहना है कि बाढ़ जैसी समस्या से जहां दो-चार हो रहे हैं। प्रशासन की ओर से किए जाने वाले कोई राहत के इंतजाम नहीं हुआ है। लोगों का यह भी कहना है कि नदी के पीछे हटने से राहत मिला है।
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कोट-
जल्द ही बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत सामग्री बंटवा दी जाएगी।
शशिकांत मणि, एसडीएम बरहज