संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया/खुखुंदू। बारिश होते ही धान की फसल को हरा-भरा करने के लिए किसानों को यूरिया की जरूरत है। ऐसे में क्षेत्र की कई समितियों पर यूरिया की किल्लत हो गई है। यूरिया समेत डीएपी और एनपीएस के लिए किसानों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। इससे किसान परेशान हैं। खुखुंदू क्षेत्र के श्रीनगर बरडीहा गोदाम पर 400 बोरी यूरिया उपलब्ध है। इसके अलावा 200 बोरी यूरिया और मिल गया है। बारिश होने से समिति के पास जलभराव हो गया है।
इसके चलते यूरिया नही पहुंच पाया। खुखुंदू समिति का एरिया बड़ा होने के बावजूद यूरिया मात्र 58 बोरी ही गोदाम मेंं बचा है, जबकि अघैला में 150 बोरी यूरिया है। पड़री पांडेय का गोदाम एकदम खाली पड़ा है।
धान की रोपाई के दौरान अधिकतर किसान मिट्टी में ही डीएपी और एनपीएस डालकर नर्सरी कराते हैं। ऐसे में अधिकतर समितियों पर यह खाद उपलब्ध नहीं है। कुछ किसान ऊपर से भी धान की फसल में एनपीएस (20-20-0-13) खाद यूरिया के साथ मिलाकर डालते हैं।
मंगलवार की सुबह करीब 11:20 पर स्थानीय गांव स्थित समिति पर पहुंचने पर देखा गया कई किसान यूरिया खाद ले रहे थे।
महाराजपुर गांव निवासी किसान गौरीशंकर, गुड्डू चौहान, नरसिंह चौहान, जैतपुरा निवासी किसान शाकिर अली, खुखुंदू निवासी, हरिनाथ, हरिशंकर गुप्ता और सझवार निवासी अभिनाश कुमार ने बताया कि बारिश के बाद धान की फसल को हरा-भरा करने के लिए यूरिया लेने आए हैं। सचिव अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि कई दिनों से यूरिया वितरित किया जा रहा है। गोदाम में 58 बोरी यूरिया, 268 बोरी डीएपी और 193 बोरी एनपीएस खाद उपलब्ध है। अघैला में 200 बोरी डीएपी और 150 बोरी यूरिया उपलब्ध है, जबकि पड़री पांडेय समिति पर खाद नहीं है। ऐसे में वहां के किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। सचिव प्रभुनाथ का कहना है कि अघैला में खाद वितरण किया गया है। पड़री पांडेय में जब स्टाॅक आएगा तो वितरित किया जाएगा। श्रीनगर बरडीहा समिति में वर्तमान में 400 बोरी यूरिया उपलब्ध है। यहां मिट्टी खाद एक बोरी भी नहीं है। सचिव विपिन कुमार मिश्र ने बताया कि टड़वा गांव के किसान सुरेंद्र चौहान, मोतीपुर निवासी रामनरेश, भैसहा निवासी रामदरश सिंह सहित अन्य किसानों को यूरिया खाद दिया गया है।