संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिला मुख्यालय व नवलपुर में बनने वाले बाईपास से प्रभावित किसानों ने उचित मुआवजे की मांग को लेकर सोमवार को ट्रैक्टर रैली निकाली। रैली की अगुवाई भारतीय किसान यूनियन व भूमि बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने की। सोनूघाट के बैतालपुर बरारी व पड़री चौराहे पर धरना दे रहे किसान बड़ी संख्या में ट्रैक्टर लेकर शहर की ओर रवाना हुए। आगे पुलिस प्रशासन और पीछे किसान व किसान संगठन के नेता चल रहे थे। कलक्ट्रेट के समक्ष पहुंचते ही कुछ किसान अंदर प्रवेश करने का प्रयास किया, लेकिन पहले से अलर्ट पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया।
इससे नाराज होकर किसान धरने पर बैठ गए और सड़क एक लेन पर आवागमन पूरी तरह से बाधित कर दिया। आवागमन बाधित होता देख एसडीएम, एएसपी उत्तरी व सीओ ने किसानों को समझा-बुझाकर शांत कराया।
इसके बाद किसान सीधे सुभाष चौक पहुंचे और सड़क को जाम करते हुए धरने पर बैठ गए। करीब दो घंटे तक किसान वहीं डटे रहे। इस दौरान किसानों ने जिला प्रशासन, एडीएम राजस्व के अलावा सांसद, विधायक व अन्य नेताओं को जमकर खरी-खोटी सुनाई।
इसके बाद डीएम दिव्या मित्तल ने किसानों व किसान संगठनों के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता की। डीएम ने किसानों की 11 सूत्री मांगों को सुना। उन्होंने शासन के नियमों का हवाला दिया। उन्होंने सिर्फ उनकी मांगों से शासन स्तर के अधिकारियों को अवगत कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसान वापस आए और धरने को समाप्त कर दिया।
किसानों को संबोधित करते हुए भाकियू पूर्वी उप्र उपाध्यक्ष किसान नेता विनय सिंह सैंथवार ने कहा किसानों को उचित मुआवाज दिला पाने में जिला प्रशासन असफल है। किसानों का बरारी मोड़ व पड़री चौराहे पर चल रहा धरना समाप्त किया जाता है। किसान पहले अपनी खेतीबारी का कार्य पूरा करें, इसके बाद आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
एडीएम प्रशासन व सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों के खिलाफ की नारेबाजी
किसानों ने सुभाष चौक पर धरना देते समय जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ भाजपा के जनप्रतिनिधियों को खूब खरी खोटी सुनाई और उनके विरुद्ध नारेबाजी की।
किसानों का आरोप था कि एडीएम प्रशासन किसानों का उत्पीड़न कर रहे है। उनके द्वारा मुआवजा से संबंधित कागज जमा कराए जाने पर नाराजगी व्यक्त की गई। किसान नेता विनय सिंह सैंथवार ने कहा सरकार मुआवजा देने के नाम पर किसानों का गला रेत रही है।
भूमि बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष अजीत कुमार त्रिपाठी ने कहा कि प्रदेश के किसी भी जिले में 67 प्रतिशत की कोई कटौती नहीं हो रही हैं।