सलेमपुर। किसानों की सूखा राहत की अधूरी सूची लेखपाल बनाकर भेज रहे हैं। इसकी वजह से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा सूखा राहत की सूची में खेतों का रकमा सही तरीके से नहीं दर्ज करने पर किसी किसानों के बैंक अकाउंट में अधिक तो किसी में कम रकम आ रही है। इससे नाराज तेतरी हरदो गांव के किसानों ने तहसील दिवस में मंगलवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान एसडीएम और किसानों के बीच तकरार भी हुई।
किसानों में सूखा राहत की रकम वितरण करने में जिले के अन्य तहसीलों से सलेमपुर पीछे हैं।
इसके लिए डीएम अनिता श्रीवास्तव ने कई बार तहसील के अफसरों को फटकार लगा चुकी। अफसरों के बढ़ते दबाव को देखे हुए लेखपाल मनमानी तरीके से किसानों की सूखा राहत की सूची तैयार कर रहे हैं। इससे पड़री गजराज, नवलपुर, सहला, कोहरा, नदौली, लार समेत अन्य गांव के तहसील में पहुंचे किसानों का आरोप है कि खेतों का बिना सर्वे किए लेखपाल सूखा राहत की सूची बना रहे हैं। इसके कारण बराबर के रकबा वाले किसानों की रकम कम और अधिक बैंक अकाउंट में आ रही है। इससे किसान असमंजस में पड़े हुए हैं।
मंगलवार को लेखपालों को एसडीएम और सीओ के आवास पर सूची बनाने के लिए बैठाया गया था। ताकि लोगों की भीड़ के चलते काम प्रभावित न हो। वहीं, सूखा राहत की रकम अकाउंट में नहीं आने से नाराज तेतरी हरदो गांव के किसान तहसीलदार दिवस में पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए लेखपाल पर मनमानी का आरोप लगाया। इस दौरान एसडीएम और किसानों के बीच जमकर बहस भी हुई। सूखा राहत की सूची बनाने में लापरवाही बरतने वाले चार लेखपालों पर कार्रवाई भी हो चुकी है। बावजूद इसके लेखपाल सूची तैयार करने में तेजी नहीं ला रहे हैं।
इस बाबत तहसीलदार राहुल देव भट्ट ने बताया कि ऐसी शिकायतें मिल रही हैं। लेकिन जितने किसानों का बैंक अकाउंट मिल रहा है। उतने लोगों की सूची बनाकर भेज दी जा रही है। लेखपालों को सूची बनाने में तेजी लाने को कहा गया है।