रुद्रपुर के दोआबा में मंगलवार को लगी आग के बाद बुधवार की सुबह खेतों में जली गेंहू की बालियों को बटोरता किसान
अपने खून, पसीने से धरती को सींच कर अनाज पैदा करने वाले किसनों की किस्मत पर आग का ग्रहण लग गया है। दोआबा में साल दर साल बढ़ती जा रही आग की घटनाएं दस हजार किसान परिवारों के सामने भुखमरी की संकट खड़ा कर दी है। मंगलवार को भीषण आग में गेहूं की फसल गावाने के बाद दोआबा के आठ गांवों में चारो तरफ मातम पसरा है। किसान और उनके परिवार के बच्चें गेहूं के जले खेत की राख में जिंदगी तलाशने को मजबूर हैं।
दोआबा में भीषण अग्निकांड के दौरान आठ गांवों की दो हजार एकड़ गेहूं की फसल जल कर राख हो गई है। बुधवार की सुबह इन गांवों में जले खेत में किसानों का परिवार बालियां चुन रहा था। आग में सब कुछ गवां चुके किसानों के माथे पर पेट की आग बुझाने की चिंता साफ दिखी। रुद्रपुर क्षेत्र में आग की घटनाएं कोई नई नहीं है। यहां हर साल आग से लाखों की फसल बर्बाद होती है।
लेकिन जनप्रतिनिधि और नेता आग की रोकथाम के स्थाई उपाय पर कभी भी संवेदनशील नहीं हुए। यह अलग बात है कि आग लगने पर हर दल का नेता अपनी मांगों का पुलिंदा लेकर दौड़ने लगता है। तहसील कार्यालय से मिली रिपोर्ट के अनुसार रुद्रपुर क्षेत्र में आग से नुकसान का आकंड़ा हर साल बढ़ रहा है। वर्ष 2013-14 में आग से 32 लाख रुपयें की फसल जली थी। वर्ष 2014-15 में आग लगने से किसानों का 40 लाख का नुकसान हुआ था, और वर्ष 2015 में आग से 40 लाख रुपयें की गेहूं की फसल जलकर नष्ट हो गई।