अनुदानित स्कूलों के फर्जी शिक्षक भी रडार पर
देवरिया। अनुदानित स्कूलों में शिक्षक भर्ती मामले में जिले में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों का पर्दाफाश होने के साथ ही पिछले कई सालों से इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक अब सीधे एसटीएफ की रडार पर हैं। इनके शैक्षिक अभिलेख के सत्यापन एवं नियमों को दरकिनार कर की गई नियुक्तियों की उच्च स्तरीय जांच कराने की तैयारी हो रही है। उधर बार-बार जांच एजेंसी के बीएसए कार्यालय आने से इन स्कूलों के प्रबंधकों एवं संदिग्ध शिक्षकों में हड़कंप मचा है। अपने बचाव के लिए वह पूर्व में यहां रहे अधिकारियों एवं आकाओं से उपाय भी ढूढ़ने में लग गए हैं।
अनुदानित स्कूलों में फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण के मास्टर माइंड माने जा रहे पुरना छापर, भटनी निवासी एवं लघु माध्यमिक विद्यालय शाहपुर पुरैनी में शिक्षक सतीश चंद्र मिश्र उर्फ राजू को 17 फरवरी को एसटीएफ की गोरखपुर इकाई ने हिरासत में लिया था। जांच एजेंसी की पूछताछ में उसने फर्जीवाड़े की पोल खोली है। साथ ही कई स्कूलों व शिक्षकों के नाम उसने लिए हैं, जहां फर्जी अभिलेख के सहारे कई शिक्षक आराम से नौकरी कर रहे हैं। जब से सतीश चंद्र जांच एजेंसी की पकड़ में आया है, संबंधित शिक्षकों के रातों की नींद उड़ गई है। उन्हें डर सताने लगा है कि जांच की आंच एक दिन उन्हें भी झुलसाएगी। अब वह अपने प्रबंधक व पूर्व में तैनात रहे अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, ताकि किसी तरह मामला मैनेज हो जाए। सरकारी नौकरी कहीं हाथ से फिसल न जाए, इसके लिए वह मोटी रकम भी खर्च करने को तैयार दिख रहे हैं।
वर्ष-2000 के बाद हुई नियुक्तियों की फाइलों को खंगाला जा रहा
बृहस्पतिवार को जांच एजेंसी के आने के समय अनुदानित स्कूल पटल देख रहे बाबू मौके पर मौजूद नहीं थे। शुक्रवार को वह आए तो बीएसए के आदेश पर संबंधित शिक्षकों के फाइलों को ढूंढने में लगे रहे। वर्ष-2000 के बाद हुई नियुक्तियों से जुड़ी फाइलों को खंगाला जा रहा है। कई अनुचर भी इस कार्य को करने में लगे रहे। जांच एजेंसी की कार्रवाई का भय सबके चेहरे पर पर दिखता रहा।
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लेखा विभाग में दिखने वाले शिक्षक हो गए लापता
फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने के बाद अनुदानित स्कूलों के वे शिक्षक जो हमेशा बीएसए कार्यालय के लेखा अनुभाग में जमे रहते थे, वे अचानक नहीं दिखने लगे हैं। अन्यथा वह लेखा के ही विभिन्न पटलों के कर्मचारियों के साथ बैठकर कार्यालय की शोभा बढ़ाते थे। अनुदानित स्कूलों के भुगतान संबंधित पटल देखने वाले बाबू की ठाठ भी देखते ही बनती थी। भुगतान से संबंधित कोई मामला होने पर लेखाधिकारी से मिलने के पहले इसी बाबू को ही पेशगी देना अनिवार्य शर्त थी।
कोट्स
बृहस्पतिवार को आई जांच एजेंसी के सदस्यों ने एडेड स्कूल में नियुक्ति सहित अन्य प्रक्रिया को जानने की कोशिश की। उन्हें बताया गया कि यहां पर मैनेजमेंट को ही इसका अधिकार होता है। शिक्षकों से संबंधित पत्रावली भी उन्हीं के पास होती है। बीएसए के पास केवल नियुक्तियों का अनुमोदन करने का अधिकार है। एसटीएफ जो भी जरूरी सूचनाएं चाहेगी, उसे उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रकाश नारायण श्रीवास्तव, बीएसए