बरहज। नगर स्थित मुख्य चौक पर 14 अगस्त 1942 को कैप्टन मूर की गोली से लहूलुहान होने के बाद भी पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल ने तिरंगा झंडा फहराते हुए क्षेत्र को आजाद घोषित कर दिया था।
उनका रक्तरंजित शव जमीन पर पड़ा देख भीड़ उग्र हो गई थी। मजबूर होकर अंग्रेजी सेना को पीछे हटना पड़ा था। दोनों आजादी के दीवानों की शहादत विस्मरणीय है।
सरयू में विलीन कुरह परसियां गांव निवासी पंडित विश्वनाथ मिश्र और बरौली के जगन्नाथ मल्ल सहित हजारों लोगों की भीड़ 14 अगस्त 1942 को मुख्य चौक पर जमी हुई थी। भीड़ में स्थानीय सहित आसपास के गांवों के लोग शामिल थे। वहीं अंग्रेजी सेना भी मोर्चा संभाले हुए थी। पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल भीड़ को चीरते हुए आगे आकर तिरंगा फहरा दिया।
इस पर कैप्टन मूर ने आंदोलन के दोनों नायकों को गोली मार दिया। गोली लगने के बाद भी दोनों वीर सपूतों ने तिरंगा को झुकने नहीं दिया। वंदे मातरम और भारत माता के जयघोष से समूचा क्षेत्र गुंजायमान हो गया था। 25 वर्ष की आयु में पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल आजादी के आंदोलन में कूद पड़े थे।