जिला विकलांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) के कर्मचारियों को पांच महीने का मानदेय मिलेगा। अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर जिलाधिकारी ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को पत्र लिखा था। इस पर केंद्र से मानदेय देने के लिए धन की स्वीकृति मिली है।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से अगस्त 2011 में डीडीआरसी की स्थापना कर भारतीय रेडक्रास सोसायटी को जिम्मेदारी दी। 10 पदों के सापेेक्ष आठ कर्मचारियों की तैनाती की गई। इस केंद्र पर थेरेपी के माध्यम से लोगों के पुनर्वास का कार्य किया जाता है। जेई और एईएस पीड़ित बच्चों को यहां से काफी लाभ होता है। यहां तैनात संविदा कर्मचारियों को शुरू में मानदेय मिल जाता था, लेकिन पिछले एक वर्ष से यहां के कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिल रहा था। इसके चलते कर्मचारियों की दिक्कत बढ़ गई थी। ऐसा लग रहा था कि डीआरसी बंद हो जाएगा। अमर उजाला ने छह मई के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर का संज्ञान लेकर जिलाधिकारी ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को पत्र लिखा था। डीएम के पत्र का मंत्रालय ने संज्ञान लिया। वहां से कर्मचारियों को पांच महीने का मानदेय देने के लिए धन स्वीकृत किया गया है। मानदेय मिलने की सूचना पर कर्मचारियों में खुशी है। उनका कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होंगी।