फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन दिन से अभिलेखों में रामअवध के जिंदा

विज्ञापन
विज्ञापन
तीन दिन से अभिलेखों में रामअवध के जिंदा
विज्ञापन

होने के सुबूत तलाश रहे तहसील कर्मचारी
- जांच अधिकारी गए छुट्टी पर, तीन दिन में देनी थी रिपोर्ट
- जिलाधिकारी ने स्वत: संज्ञान लेकर जांच के दिए हैं आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। तहसील के राजस्व अभिलेखों को मृत घोषित किए गए रामअवध के जिंदा होने के तीन दिन से सबूत तलाशे जा रहे हैं। रामअवध हर अफसर के आगे हाथ जोड़कर कह रहा है कि वह जिंदा है। पर उसकी बात पर यकीन करने के बजाय राजस्व कर्मचारियों से लेकर पुलिस की लोकल इंटेलिजेंस की टीम इधर-उधर पूछताछ करके पता कर रही है कि रामअवध जो कह रहे हैं, वह सही है अथवा नहीं। उधर जांच अधिकारी बनाए गए एसडीएम सुनील कुमार सिंह छुट्टी पर चले गए हैं।
अमर उजाला में राम अवध को सरकारी कागजात मृत दिखाने की खबर के प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया प्रशासन तीन दिन बाद फिर ढीला पड़ता नजर आ रहा है। डीएम आशुतोष निरंजन की ओर से नियुक्त जांच अधिकारी एसडीएम सुनील कुमार सिंह के छुट्टी पर होने के कारण अभी डीएम को रिपार्ट नहीं सौपी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

तीन दिन पहले डीएम ने अमर उजाला की खबर का स्वत: संज्ञान लेकर एसडीएम सुनील को तीन दिन में जांचकर रिपार्ट देने के निर्देश दिए थे। पीड़ित रामअवध ने कहा कि आठ साल पहले लेखपाल और कानूनगो ने हेराफेरी कर राजस्व अभिलेख में उन्हें मृत घोषित कर दिया। साथ ही उनकी तीस लाख रुपये कीमत की 30 कट्टा जमीन पट्टीदारों के नाम कर दी। तीन साल जब उन्हें इस बात की जानकारी हुई तो तबसे अपने जिंदा होने का सबूत लेकर तहसील के चक्कर काट रहे हैं। न्यायिक प्रक्रिया में देरी के कारण न्याय मिलने की आस धूमिल हो गई थी। लेकिन इधर तीन दिनों से मामले में आई तेजी से सांस टूटने के पहले न्याय मिलने की आस बंध रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें