देवरिया शहर का एक मोहल्ला चटनी गड़ही भी है। रामकृपाल दुबे बताते हैं कि 15-20 साल पहले गांव के लोग बरसात में मछली पकड़ने आते थे। नगर पालिका का पुराना वार्ड होने के बाद भी मुहल्ले का नाम सुनते ही खरीदार भाग जाते थे। शहर में मेडिकल काॅलेज खुलने, फोरलेन का निर्माण होने व सड़कों का जाल बिछने के बाद मुहल्ले की पहचान गायब हो गई है। दो लाख रुपये कट्ठा न बिक पाने वाली जमीनें अब 70 लाख रुपये कट्ठा तक बिक रही हैं।
इसे भी पढ़ें: मानिकपुर में चारागाह की जमीन से प्रशासन ने अतिक्रमण हटाया
खेती भी नहीं होती थी यहां, बस गया मंगलमपुरम
चकियवा वार्ड में रेलवे लाइन किनारे करीब 40 हेक्टेयर जमीन परती रहती थी। आज यहां मंगलमपुरम के नाम से दो मुहल्ले बस गए हैं। पिपरपाती गांव के गुलाब यादव, शिवाकांत मिश्र बताते हैं कि बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाती थी। रेलवे लाइन होने के कारण चार महीने तक पानी भरा रहता था। कई लोगों ने 10 साल पहले डेढ़ से दो लाख रुपये कट्ठा पर जमीनें बेच दीं। अब यहां मंगलमपुरम, फेज एक और दो नाम से दो काॅलोनियां बस गई हैं। 30 से 40 लाख रुपये कट्ठा जमीन बिक रही है। नगर पालिका सड़क व जलनिकासी का इंतजाम करा रही है।
फोरलेन का निर्माण शुरू होने के साथ ही राजकीय आईटीआई से लेकर सोनूघाट तक जमीनों की कीमत काफी बढ़ गई है। शहर के नामी स्कूल व अस्पताल जेल से लेकर सोनूघाट के बीच खुले हैं। इन सुविधाओं को देखते हुए लोग यहां घर बना रहे हैं।
- संजय शंकर मिश्र, सोंदा
पिपरपाती और चिंतामन चक के बीच और चकियवा वार्ड में रेलवे लाइन किनारे की जमीन तालनुमा थी। यहां खेती भी नहीं हो पाती थी। पांच साल पहले दो से ढाई लाख रुपये कट्ठा यहां जमीन बिकी। शहर में मेडिकल कालेज खुलने व सड़कों का जाल बिछने से लोग इन जमीनों पर घर बनाते जा रहे हैं। आज जमीन की कीमत सड़क से आधा किमी भीतर 25 लाख तक पहुंच गई है।
- संजय मिश्रा, पिपरपाती
गड्ढानुमा जमीन होने के कारण इस मुहल्ले का नाम चटनी गड़ही है। 10 साल पहले यहां घर बनाना तो दूर लोग खेती के लिए जमीन खरीदना पसंद नहीं करते थे। शहर का विकास होने के चलते लोगों को अब यह मुहल्ला भाने लगा है। 70 लाख रुपये कट्ठा की दर तक जमीन बिक रही है।
- राम कृपाल तिवारी, चटनी गड़ही मोहल्ला
इसे भी पढ़ें: किशोरी को भागने के मामले में युवक पर अपहरण का केस दर्ज
शहर में जहां पर भी सड़कों का निर्माण कार्य चल रहा है, वहां की जमीनों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। फोरलेन के आसपास की जमीनों पर खूब भवन बन रहे हैं। लिंक रोड बनते जा रहे हैं, जमीनें महंगी होती जा रही हैं। भवनों का निर्माण होता जा रहा है। -एके ओझा, इंजीनियर मास्टर प्लान
सोंदा, पिपरपाती, चिंतामन चक आदि पहले ग्रामीण इलाके थे। अब यह नगर पालिका में शामिल हो गए हैं। यहां सड़क, नाली, पथ प्रकाश समेत अन्य सुविधाओं का खाका तैयार किया गया है। सुविधाएं मिलने से जमीन की कीमत आने वाले दिनों में और बढ़ेगी। - रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका