भाटपाररानी। क्षेत्र के बनकटा मिश्र में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथावाचक पंडित बृजेश मणि त्रिपाठी ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष आदि प्रसंगों का सुंदर वर्णन करते कहा कि सुदामा जी भगवान कृष्ण के परम मित्र होकर भी भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते।
परंतु वे हमेशा कृष्ण के ध्यान में मग्न रहते। सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारका पहुंचते हैं। कृष्ण और सुदामा का मिलन और महल में उनके आदर सत्कार का प्रसंग सुनकर श्रोता भावविह्वल हो गए।
अगले प्रसंग में कथा वाचक ने शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिन तक श्रीमद्भागवत कथा सुनने और उनके मन से मृत्यु का भय निकलने एवं तक्षक नाग द्वारा राजा परीक्षित को डसने व राजा परीक्षित के परमधाम को पहुंचने की कथा सुनाकर श्रोताओं में को भक्ति भर दिया। संवाद