सोनूघाट। शहर के अगस्तपार से धमऊर परशुराम को जाने वाली सड़क का निर्माण विभाग की उदासीनता के चलते अधर में लटकी है। 4.18 करोड़ रुपये की लागत से जनवरी माह तक सड़क बन जानी थी। लेकिन अभी तक सड़क का निर्माण कार्य अधूरा है। इधर अमर उजाला ने उक्त सड़क की समस्या को 20 अगस्त के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिस पर विभाग की तरफ से एक सप्ताह में सड़क निर्माण शुरू कराने की बात कही गई थी, लेकिन एक पखवारा बीत जाने के बाद भी सड़क जस की तस की तस है।
मालूम हो कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अगस्तपार से धमऊर परशुराम तक करीब 6.500 किमी लंबी सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ तो ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। जनवरी में 4.18 करोड़ की लागत से बन रही सड़क का निर्माण कार्य पूरा कर लेना था, लेकिन विभागीय लारपवाही के चलते कार्य पूरा करने की कौन कहे अभी तक गिट्टी गिराकर रोलर चलवाया गया है। सड़क पर उखड़ी गिट्टी से होकर गुजरना उनकी मजबूरी है। इधर सड़क की जगह-जगह गिट्टी उखड़ने से लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
24 गांव के ग्रामीणों को हो रही परेशानी
शहर के आईटीआई के अगस्तपार से लगायत धमउर परशुराम गांव के साथ साथ करीब 24 गांव के लोगों को सड़क निर्माण न होने व उखड़ी गिट्टियों के चलते दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग से होकर धमऊर गोपाल, सहजौली, पिपरा चंद्रभान, रानीघाट, फुलवरिया लक्षी, हाटा खास, कुर्थियां, मठटोडर गिरि सहित 24 गावों के लोग आते-जाते हैं। देवरिया शहर में आने का सीधा रास्ता होने के चलते इस मार्ग पर काफी लोगों की आवाजाही रहती है। सबसे ज्यादा परेशानी साइकिल स्कूल आने वाले स्कूली बच्चों को हो रही है।
क्या बोले लोग
सड़क की हालत बद से बदतर हो गई है। ठेकेदारों को स्थानीय लोगों की कोई चिंता ही नहीं है।
-मनोज, अगस्तपार निवासी
एक साल से गिट्टी गिराकर विभाग सो गया है। उनको इसकी कोई चिंता नहीं है। परेशानी तो हम लोग झेल रहे हैं।
-अनिल सिंह, धमऊर परशुराम, निवासी
हम लोगों को आने जाने में बहुत कठिनाई होती है। एक तो पैर से विकलांग हूं दूसरा सड़क पर गिट्टियां हाेने से चलने में दिक्कत होती है।
-गोविंद प्रसाद, निवासी रानीघाट
कोट
दो सितंबर तक सड़क निर्माण का समय निर्धारित किया था। लेकिन किसी कारणवश सड़क का पूरी की कौन कहे निर्माण कार्य नहीं शुरू हो सका है। ठेकेदार से बातचीत कर इस सप्ताह से सड़क का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
-सूर्य प्रकाश, अधिशासी अभियंता, आरईएस