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खुखुंदू को ब्लॉक बनाने की दरकार, मुद्दा पहुंचा सीएम दरबार

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खुखुंदू को ब्लॉक बनाने की दरकार, मुद्दा पहुंचा सीएम दरबार
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खुखुंदू (देवरिया)। खुखुंदू को ब्लॉक बनाने का मुद्दा फिर गर्म हो गया है। हाल ही में वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान रामपुर कारखाना के विधायक कमलेश शुक्ल ने इस मामले को सीएम के सामने रखा। शनिवार को देवरिया आगमन पर विधायक प्रतिनिधि डॉ. संजीव शुक्ल ने भी सीएम को इस मामले से संबंधित ज्ञापन सौंपा। इससे संघर्ष समिति सहित क्षेत्रीय लोगों में एक बार फिर आस जगी है।
खुखुंदू को ब्लॉक बनाने की मांग वर्ष 1991 में उठी थी। पांच दिनों तक आंदोलन भी चला। आंदोलन के अंतिम दिन पूर्व विधायक आनंद यादव, सलेमपुर के पूर्व चेयरमैन सुधाकर गुप्ता, बेचूलाल चौधरी, बंकटेश्वर यादव, नथुन राय, सोबराती किदवई, दीनदयाल यादव, राजेश यादव, लियाकत अहमद और राजकिशोर यादव सहित अन्य कई लोग जेल भी गए। इसके बाद भी लोग पीछे नहीं हटे। मुद्दा गरमाता गया। इसको देखते हुए सन् 1994 में देवरिया के जीआईसी प्रांगण में एक कार्यक्रम में आईं तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने खुखुंदू, तरकुलवा सहित तीन ब्लॉकों की घोषणा कर दी।
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वर्तमान कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही की सक्रियता से तरकुलवा तो बहुत पहले ही ब्लाक बन गया, लेकिन राजनीतिक उपेक्षा से खुखुंदू उपेक्षित ही रहा। ब्लॉक निर्माण को लेकर लगातार ढाई माह तक क्रमिक अनशन भी चला। उसके बाद बनी सपा सरकार में मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव ने समिति के मंच पर स्वयं आकर आश्वासन दिया था कि सपा की सरकार बनते ही बीडीओ की तैनाती हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। भाजपा शासन में लोगों में आस जगी। हालांकि अब तक इस पर कोई पहल नहीं हुई है।
क्षेत्रीय विधायक ने चार दिन पहले योगी आदित्यनाथ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत के दौरान इस मुद्दे को उठाया। इसके बाद शनिवार को देवरिया आए मुख्यमंत्री को विधायक प्रतिनिधि ने ब्लॉक निर्माण का ज्ञापन भी सौंपा। इसे लेकर इलाके के लोगों में काफी खुशी है। उधर, सदर सांसद डॉ. रमापति राम त्रिपाठी से भी संघर्ष समिति के लोग मिलकर ज्ञापन दे चुके हैं। उनसे भी आश्वासन मिला है।
कई बार शासन को भेजा जा चुका है परिसीमन
वर्ष 2007 में तत्कालीन सीडीओ हरेंद्रवीर सिंह ने नवसृजित ब्लॉक के लिए परिसीमन तैयार कर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। इसमें भलुअनी ब्लॉक से तीन न्याय पंचायत, सलेमपुर, भागलपुर व देवरिया से दो-दो और भटनी से एक न्याय पंचायत सहित कुल दस न्याय पंचायतों को मिलाकर परिसीमन तैयार किया गया था। इन न्याय पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 58 ग्राम पंचायतों के कुल 142 राजस्व गांव शामिल हैं।
मुद्दे को लेकर 71 दिनों तक चला है आंदोलन
वैसे तो ब्लाक निर्माण को लेकर सैकड़ों बार आंदोलन, धरना प्रदर्शन हो चुका है, लेकिन सबसे अधिक समय तक आंदोलन वर्ष 2011 में लगातार 71 दिनों तक चला था। चार अक्तूबर से 16 दिसंबर 2011 तक संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन चलता रहा। अपनी रथ यात्रा के दौरान पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने खुद धरना स्थल पर जाकर घोषणा की थी कि सपा की सरकार बनते ही ब्लॉक निर्माण हो जाएगा। सरकार भी बनी क्षेत्र के सभी सीटों से सपा के उम्मीदवार भी जीते, लेकिन अब तक ब्लॉक नहीं बन सका।
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पांच वर्ष पूर्व विधान सभा में भी उठ चुका है मुद्दा
रुद्रपुर के पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह ने संघर्ष समिति की मांग पर खुखुंदू ब्लॉक का मुद्दा अप्रैल 2015 में विधानसभा में भी उठाया था। इसके बाद तत्कालीन शासन और प्रशासन हरकत में आया था। आनन-फानन में ब्लॉक के लिए जमीन की खोजबीन शुरू हो गई थी। इसके पहले डीएम डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद, जुहेर बिन सगीर और मणि प्रसाद मिश्र ने भी खुखुंदू को ब्लॉक बनाने के लिए क्रमश: 20, 27 अक्तूबर और 24 दिसंबर 2011 को शासन को पत्र लिखा था।
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