देवरिया। लंबी दूरी की ट्रेनों में टिकट की मांग बढ़ने के बीच तत्काल टिकट पर दलालों की नजर रहती है। दो साल में देवरिया सदर आरक्षण काउंटर से लेकर प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर के जरिये टिकट बनाने के कई मामले सामने आए।
आरपीएफ और सीआईबी ने संयुक्त कार्रवाई कर कई टिकट दलालों को गिरफ्तार किया और उनके पास से तत्काल टिकट, नकदी व टिकट फार्म बरामद किए।
28 जून 2026 को सीआईबी भटनी और आरपीएफ ने देवरिया सदर आरक्षण काउंटर के पास से इंदिरानगर वार्ड नंबर 13 निवासी अमित सोनकर को पकड़ा था। उसके पास से गोरखपुर से लोकमान्य तिलक जाने का एक तत्काल टिकट और सादा आरक्षण मांग पत्र मिला था।
पूछताछ में एक टिकट पर 500 रुपये प्रति व्यक्ति अतिरिक्त लेने की बात सामने आई थी। इससे पहले 10 जुलाई 2024 को आरपीएफ ने तत्काल टिकट के समय सादे कपड़ों में निगरानी कर दो लोगों को पकड़ा था।
उनके पास से मुंबई और सिकंदराबाद के टिकट, 7,500 रुपये नकद और दो टिकट फार्म मिले थे। जांच में टिकट उनके परिवार के सदस्यों के नाम के नहीं पाए गए थे।
23 मई 2024 को भटनी सीआईबी और कप्तानगंज आरपीएफ ने संयुक्त कार्रवाई में एक युवक को पकड़ा था। आरोप था कि वह व्यक्तिगत आईडी और प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर की मदद से रेलवे टिकट बनाकर बेचता था।
उसके पास से करीब 13,667 रुपये मूल्य के नौ टिकट बरामद हुए थे। 16 मार्च 2026 को होली के बाद लंबी दूरी की ट्रेनों में सीटें फुल होने से तत्काल टिकट की मांग बढ़ने और दलालों की ओर से मनमानी रकम वसूलने की शिकायत सामने आई थी।
29 जून 2026 को लगन के दौरान देवरिया में टिकट दलालों के सक्रिय होने और प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर की मदद से एक साथ कई टिकट फार्म भरकर टिकट निकालने की शिकायत सामने आई थी।
इसके एक दिन पहले ही आरक्षण काउंटर के पास से एक दलाल पकड़ा गया था।