संवाद न्यूज़ एजेंसी
रुद्रपुर। यहां सीएचसी पर प्रसव तेजी से घट रहा है, जबकि आश्चर्यजनक ढंग से खंडहर में तब्दील हो चुके एएनएम सेंटरों में हर माह नवजात जन्म ले रहे हैं। एएनएम सेंटर के ध्वस्त भवन में प्रसव कराकर स्वास्थ्य विभाग प्रसव का लक्ष्य पूरा करने में आंकड़ों की बाजीगरी दिखा रहा है।
रुद्रपुर में जिम्मेदार मिल जुलकर फर्जी डिलीवरी का खेल, खेल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, प्राइवेट अस्पतालों में हुए डिलीवरी को गांव के एएनएम सेंटर पर दिखाकर प्राइवेट हॉस्पिटल संचालकों से धन उगाही का खेल चल रहा है। नवजात का जन्म प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्राइवेट अस्पताल के संचालक एएनएम और आशा कार्यकर्ता का सहारा ले रहे हैं।
एएनएम सेंटर पर डिलीवरी दिखाकर सीएचसी से जन्म प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है। सीएचसी के अंतर्गत नौ एएनएम सेंटर है। इसमें अधिकतर एजर्जर हो गए हैं। जर्जर भवन में एएनएम प्रसूताओं की डिलीवरी दिखाकर सरकारी आंकड़ा बढ़ा रही हैं। यह काम कागज में चल रहा है।
बदले में प्राइवेट अस्पताल में पैदा होने वाले बच्चे की गिनती सरकारी हो जा रही है। बरुद्रपुर सीएचसी के अन्तर्गत डाला, डढ़िया, सिलहटा, खोरमा, बैंदा, पिचलड़ी, मदनपुर, सराव और टड़वा गांव में महिलाओं की डिलीवरी के लिए एएनएम सेंटर हैं। इसमें टड़वा, डाला, सिलहटा, डढ़िया, खोरमा, बैंदा के एएनएम सेंटर का भवन गिर गया है।
सीएचसी पर 30 शैय्या का महिलाओं के लिए वार्ड है, जहां आशा कार्यकर्ता प्रसूताओं को ले जाने से कतरा रही हैं।सीएचसी पर दिन प्रतिदिन डिलीवरी की संख्या में कमी हो रही है। एक आशा कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सीएचसी पर डिलीवरी कराने पर प्रसूता से रुपये लिए जाते हैंं। महिला डाॅक्टर बाहर से दवा मांगती हैं।
कैल्शियम और आयरन जैसी दवाएं जो हॉस्पिटल में उपलब्ध हैं, वह भी बाहर से लेनी पड़ती है। सीएचसी पर डिलीवरी कराने में जो खर्च आता है, उतने खर्च में ही प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी हो जाती है और मरीज को ले जाने वाली आशा कार्यकर्त को भी अच्छी रकम कमीशन में मिल जाती है।
प्रसव के तीन माह के आंकड़े बता रहे हैं कि अप्रैल माह में सीएचसी पर 45 और एएनएम सेंटर पर 71, मई माह में सीएचसी पर 77 और एएनएम सेंटर पर 55, जून माह में सीएचसी पर 66 और एएनएम सेंटर पर 58 डिलीवरी हुईं।