अगस्त में ओमान गए थे सूरज
कर्माजीतपुर गांव निवासी ओमप्रकाश यादव के पुत्र सूरज यादव मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे और रोजगार के सिलसिले में बीते अगस्त माह में ही ओमान गए थे। परिजनों को उम्मीद थी कि वह जल्द ही सकुशल घर लौटेंगे, लेकिन बुधवार देर रात आई एक मनहूस खबर ने पूरे परिवार के सपनों को चकनाचूर कर दिया। परिजनों के अनुसार, सूरज जिस वाणिज्यिक जहाज पर तैनात थे, वह ओमान से भारत की ओर आ रहा था। इसी दौरान रास्ते में जहाज पर एक मिसाइल हमला हो गया, जिसमें सूरज की जान चली गई। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और रिश्तेदारों व ग्रामीणों का सांत्वना देने के लिए तांता लग गया।
दिल्ली और गोरखपुर एयरपोर्ट से होते हुए गांव पहुंचा पार्थिव शरीर
लंबे इंतजार के बाद रविवार को ओमान से सूरज का पार्थिव शरीर विशेष विमान द्वारा दिल्ली और फिर वहां से अपराह्न 3:20 बजे गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचा। एयरपोर्ट पर औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शाम 4 बजे शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद एंबुलेंस के जरिए पार्थिव शरीर को कर्माजीतपुर गांव लाया गया।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा पूरा जवार
गांव के लाल के अंतिम दर्शन के लिए सूरज के दरवाजे पर पहले से ही सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी हुई थी। एंबुलेंस से जैसे ही ताबूत को नीचे उतार कर दरवाजे पर रखा गया, लोगों की भीड़ एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़ी। ताबूत खुलते ही मां पुष्पा देवी बेटे के शव से लिपटकर बेसुध हो गईं, वहीं पिता ओमप्रकाश यादव सदमे से जमीन पर गिर पड़े। इसके अलावा, भीड़ से अलग सूरज के बाबा रामा यादव अपने छोटे पोते सन्नी से लिपटकर फूट-फूटकर रोते नजर आए। वहां मौजूद हर शख्स की आंखें इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर नम हो गईं।
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
इसके बाद कर्माजीतपुर से भटौली बुजुर्ग होते हुए शव यात्रा खरोह चौराहा और गोरखपुर मुख्य मार्ग से गुजरी। मझना नाला के पास देर शाम भारी भीड़ और नम आंखों के बीच सूरज का अंतिम संस्कार किया गया। टूटे हुए और भारी कदमों के साथ पिता ओमप्रकाश यादव ने अपने जिगर के टुकड़े को मुखाग्नि दी। इस दौरान सैकड़ों युवाओं ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों के साथ अपने लाडले को अंतिम विदाई दी।