जब शहर की ही परवाह नहीं तो गांवों को कौन पूछे
देवरिया शहर की खराब सड़कों का मामला उप चुनाव में मुद्दा बन सकता है। क्योंकि जनप्रतिनिधियों और अफसरों को जब शहर की सड़कों की परवाह नहीं है तो ग्रामीण अंचल की सड़कों को कैसे देखेंगे।
शहर में कृषि मंत्री, सांसद और सत्ताधारी दल के कई विधायक भी रहते हैं। इनके अलावा प्रदेश सरकार के मंत्री और शासन के प्रमुख सचिव का भी आना-जाना लगा रहता है, लेकिन बरसों से हालात नहीं बदले। जनप्रतिनिधियों ने इसके लिए क्या प्रयास किया यह तो वहीं बताएंगे लेकिन सड़कों पर गड्ढे का मामला चुनाव में उन्हें लोगों के सवालों से परेशान जरूर करेगा।
जिले में वैसे तो खराब सड़कों पर चलना दुश्वार हो गया है, लेकिन खराब सड़कों का मुद्दा ग्रामीण इलाकों से अधिक शहर में गंभीर है। शहर में कई साल हो गए प्रशासन और नगरपालिका के आपसी खींचतान में कोई नई सड़क नहीं बन सकी है। पुरानी सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे है, लेकिन इसे किसी को नहीं दिखता है।
हनुमान मंदिर से राघवनगर, सिविल लाइन से दीवानी कोर्ट, पोस्टमार्टम चौराहा, रामनाथ देवरिया, भटवलिया, साकेतनगर, उमानगर, देवरिया खास, कसया रोड, सिंधी मिल की सड़कों पर गड्ढों की भरमार है। जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। मोहल्लों में अधिकतर सड़कों की तालाब जैसी स्थिति बन गई है। वैसे भी मोहल्लों की सड़कों पर अतिक्रमण फैल गया है। स्थानीय निवासी अशोक मद्देशिया का कहना है कि रास्ता इतना ऊबड़खाबड़ है कि ई रिक्शा से लोग यात्रा करते तो कमर में दर्द पैदा हो जाता है।
शहर की अधिकतर सड़कें गड्ढे में ही तब्दील हो गई है। प्रधानाचार्य मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तमाम सड़कों पर खाई जैसे गहरे गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उपचुनाव में बदहाल सड़कों पर विभिन्न दलों से वोट मांगने आने वाले नेताओं का जनता स्वागत करेंगी।
शहर की सड़कों पर गड्ढा पाटने का निर्देश नगरपालिका को दिया गया है। जल्द ही गड्ढे भर दिए जाएंगे। जरूरत पड़ी तो पीडब्लूडी की भी मदद ली जाएगी।
अमित किशोर, डीएम