अयोध्या के होमस्टे मेंं पहले युवती, फिर खुद को गोली मारने वाले युवक का किया गया अंतिम संस्कार
पिता ने बेटे को दी मुखाग्नि, मझले बेटे रजत ने अशोक गुप्ता को संभाला
तीनों भाइयों में था सबसे छोटा आयुष, बीएससी नर्सिंग की कर रहा था पढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। अयोध्या में प्रेमिका को गोली मारने के बाद खुद को गोली से उड़ा लेने वाले युवक आयुष कुमार गुप्ता का सोमवार को बड़हलगंज स्थित मुक्तिधाम पर गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। पिता अशोक कुमार गुप्ता ने कांपते हाथों से बेटे को मुखाग्नि दी। यह देख मुक्तिधाम पर गमगीन माहौल हो गया। पिता ने कहा कि बेटे आयुष से ढेरों उम्मीद थी, पर एक झटके में सब टूट गया। जब युवती के बारे में जानने की कोशिश की गई तो कुछ भी कहने बचते रहे।
वारदात के बाद से परिवार पूरी तरह टूट चुका है। शहर के भुजौली कॉलोनी स्थित आयुष के मकान से दूसरे दिन भी सिसकियों की आवाज रुक-रुक कर सुनाई दे रही थी। पिता अशोक ने बस इतना कहा कि मैं रोज की तरह अपनी दुकान पर था। देर शाम जब घर पहुंचा तो बेटे की मौत की खबर मिली। यह कहते हुए उनकी आंखें भर आईं। मझले बेटे रजत गुप्ता ने पिता को संभाला।
परिवार वालों ने बताया कि तीन भाइयों में आयुष सबसे छोटा था। तीन दिन पहले आयुष घर के बाहर दिखा था। अगल-बगल के लोगों ने बताया कि वह पहले की तरह सामान्य था। ग्रामीणों और जानने वालों के अनुसार, आयुष एक सामान्य, मिलनसार और पढ़ाई में अच्छा था। उधर, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। परिवार के लोग अब भी गहरे सदमे में हैं।
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अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सका बड़ा भाई
अयोध्या में प्रेमिका को गोली मारने के बाद खुद को भी गोली से उड़ा लेने वाले आयुष के अंतिम संस्कार में उसका बड़ा भाई शामिल नहीं हो सका। आयुष के बड़े भाई की तैनाती मर्चेंट नेवी में है। वह फिलहाल फ्रांस में ड्यूटी पर है। छोटे भाई की असमय मौत की खबर मिलते ही वह टूट गया, लेकिन विदेश में होने के कारण अंतिम दर्शन नहीं कर सका।
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बड़े स्तर के कबाड़ के कारोबारी हैं आयुष के पिता
फोटो..
बिहार के बेतिया और सिवान में भी पहले चलता था कारोबार
खुखुंदू। आयुष के पिता अशोक कबाड़ के बड़े कारोबारी हैं। गांव के चौराहे पर इनकी कबाड़ की बड़ी दुकान है। अशोक का पहले बिहार प्रांत के सिवान और बेतिया में कबाड़ का बहुत बड़ा कारोबार चलता था। फिलहाल इन दिनों महुई श्रीकांत गांव के चौराहे पर कबाड़ की दुकान संचालित हो रही है।
महुई श्रीकांत गांव निवासी स्व. राधे गुप्ता के दो बेटों में अशोक कुमार गुप्ता दूसरे नंबर के हैं। पिता और बड़े भाई मोहन गुप्ता की मौत के बाद यही कबाड़ की दुकान चलाने लगे। छह-सात साल पहले सिवान की दुकान बेचकर गांव के चौराहे पर आकर दुकान खोल लिया। तबसे अशोक रोजाना देवरिया से आकर दुकान पर दिनभर रहकर कारोबार देखते हैं। शाम को फिर देवरिया आवास पर परिवार के पास निकल जाते हैं। गांव से लेकर शहर तक जहां अशोक के सज्जनता की चर्चा हो रही थी, वहीं वारदात में बेटे की जान जाने को लेकर भी तरह-तरह की बातें सुनने को मिल रही हैं।