बरहज। लबकनी ईश्वर गांव स्थित मंदिर परिसर से मंगलवार को श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली। सभी ने कपरवार संगम तट से वैदिक मंत्रों के बीच कलश में जल भरा। इसे मंदिर परिसर में स्थापित कराया गया।
कथावाचक आचार्य पंडित सूर्यनारायण शुक्ल ने कलश यात्रा का नेतृत्व किया। हाथी-घोड़ा कलश यात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे। इस दौरान राष्ट्रीय लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह, शाश्वत सिंह, सुधीर यादव, ज्ञानेंद्र यादव, सूरज यादव, सूरज गोंड, अभिषेक गोंड आदि मौजूद रहे।
रामचरित मानस कथा जीवन जीने की सिखाती है कला : देवरिया संवाद के अनुसार शहर के देवरिया रामनाथ हाईडिल कालोनी स्थित सिद्धेश्वर महादेव शिव मंदिर श्री रामकथा के प्रथम सत्र में मंगलवार को श्री रामचरित मानस की महिमा बताई गई। कथा सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा व्यास जानकी दास महाराज ने कथा की निर्विध्नता और लोक कल्याण के लिए सर्वप्रथम मंगलाचरण में वाणी और विनायक की वंदना किया।
उन्होंने कहा कि श्रीरामचरित मानस केवल एक ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन जीने की सर्वश्रेष्ठ कला है। यह मानव को मर्यादा और लोक-धर्म का पाठ पढ़ाती है। संत मलूक दास की कथा सुनाते हुए जानकी दास ने श्री रामनाम जप की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि कलियुग केवल नाम अधारा सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।