देवरिया। लार कांड से सुर्खियों में छाए एसओ अंशुमान यदुवंशी ने एसपी को पटकनी दे दी। ऊंची पहुंच वाले थानेदार ने तबादला रुकवाया लिया। इस प्रकरण ने एसपी की बेबसी सामने ला दी। इससे साफ हो गया कि थानेदारों की पोस्टिंग में एसपी की नहीं, सत्ता में बैठे नेताओं की चलती है। दरोगा की इस हनक के बाद महकमे में खलबली मची है।
उधर, एसपी के नए आदेश में मृत्युंजय पाठक को रामपुर कारखाना से बनकटा, भलुअनी से बनकटा के लिए जीपी यादव का तबादला निरस्त कर एकौना, खुखुंदू एसओ नीतीश श्रीवास्तव का लार स्थानांतरण रद्द कर दिया गया है। लार कांड के बाद थानेदार अंशुमान यदुवंशी की हो रही खिलाफत को देखते हुए एसपी ने जनता और पुलिस के बीच बढ़ी दरार को भरने की कोशिश की। बुधवार को कई थानेदारों का तबादला करते हुए अंशुमान को निलंबित या लाइन हाजिर करने की बजाए एकौना भेज दिया।
ये बात थानेदार को खटक गई। ‘पानी में रहते हुए मगरमच्छ से बैर’ की कहावत को चरितार्थ करते हुए उसने एसपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। फिर क्या था, एक घंटे के अंदर दागी दरोगा के दांव के आगे कप्तान चित हो गए। ऊपर से फोन घनघनाते ही एसपी बैकफुट पर आ गए और अपने ही आदेश को निरस्त कर दिया। कागज में एकौना भेजे गए अंशुमान को लार एसओ पद पर बहाल कर दिया गया।