देवरिया। लखनऊ की मोनिका सिंह के ऊपर जानलेवा हमले के आरोपी संजय केडिया को दबिश की सूचना पहले मिल गई थी। लिहाजा लखनऊ पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह घर छोड़कर फरार हो गया। एलडीए चौकी प्रभारी अजय कुमार त्रिपाठी के साथ करीब दस पुलिसकर्मी केडिया के घर में दाखिल हुए। पुलिस ने सबसे पहले प्राइवेट सुरक्षा में तैनात बद्रीशरण सिंह और राजेश यादव की बंदूक कब्जे में ले लिया। दोनों का लाइसेंस चेक हुआ। पूछताछ में पता चला कि जेएमके सिक्योरटी के जरिए संजय केडिया ने दो प्राइवेट गनर ले रखा है जिन्हें 12 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जाता है। जांच की जद में महेश पांडेय, उमेश यादव, मुन्ना सहित कई कर्मचारी आए। एलडीए चौकी प्रभारी ने सभी से बारी-बारी पूछताछ की। केडिया के घर में लगे सीसीटीवी कैमरे की पड़ताल की गई। सूत्रों ने बताया कि संजय केडिया की पत्नी रीना केडिया से पुलिस ने पूछताछ की। खासकर मोनिका सिंह को लेकर उन्होंने बताया कि दोनों बच्चे बाहर पढ़ते हैं। दबिश के दौरान संजय केडिया के घर के बाहर स्थानीय पुलिस फोर्स भी तैनात की गई थी।
पुलिस की पड़ताल में सरकारी नगर सहित एक अंगरक्षक संदेह के घेर में आए हैं। शासन ने संजय केडिया को सरकारी गनर उपलब्ध करा रखा है। सिपाही राहुल यादव कार्बाइन के साथ संजय केडिया की सुरक्षा में लगा है। दबिश के दौरान वह केडिया के घर पर था। लखनऊ पुलिस की पूछताछ में उसने केडिया के बारे में संतोष जनक जवाब नहीं दिया। उसने बताया कि एक मई से संजय केडिया लखनऊ नहीं गए हैं। उनकी मौजूदगी सिर्फ देवरिया में है। लखनऊ पुलिस इस बात को भांप गई। सूत्रों ने बताया कि संदेह होने पर सिपाही राहुल यादव रविवार की दोपहर पुलिस लाइंस पहुंचा और आमद करने का प्रयास किया। लेकिन कोई लिखित आदेश नहीं होने पर प्रतिसार निरीक्षक ने लौटा दिया। लखनऊ में मोनिका सिंह को गोली मारने में एक दिव्यांग शूटर की पहचान हुई। उसी से मिलता-जुलता एक व्यक्ति केडिया के आवास पर मिल गया। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। राहुल यादव ने बताया कि वह करीब ढाई वर्षों से संजय केडिया के साथ गनर के रूप में है। बीच-बीच में जब सुरक्षा हटाई गई तो वह चला गया था। सूत्रों ने बताया कि संजय केडिया शहर में है। लखनऊ पुलिस के पहुंचने से पहले उसके पास पुलिस के किसी बड़े अधिकारी ने फोन कर सतर्क रहने को कहा।
चार वर्ष बाद भी एमएलसी के घर फायरिंग की जांच नहीं हुई पूरी
देवरिया। संजय केडिया जैसे प्रभावशाली लोगों ने कानून को कठपुतली बना दिया। हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी संजय केडिया को शासन ने सरकारी गनर उपलब्ध कराया। वह भी कोर्ट के नियम-कानून को ताक पर रखने के बाद रसूखदार बीते वर्षों में पुलिस अफसरों की पार्टी से लेकर नेताओं के बीच मौजूदगी दर्ज कराता रहा। उसे तनिक भी डर नहीं था कि वह कोतवाली में दर्ज पूर्व एमएलसी संजीव द्विवेदी रामू के घर फायरिंग का आरोपी है। देवरिया में कई एसपी आए और गए, लेकिन केडिया का रसूख बना रहा। पूर्व एमएलसी आवास गोलीकांड की जांच लटकाने के लिए अधिकारियों ने खुद ताना-बाना बुना। कोतवाली पुलिस से जांच लेकर एएसपी कुशीनगर को जांच सौंप दी गई। शासन ने अपने स्तर से कई जांच कराई। लेकिन संजय केडिया का बाल भी बांका नहीं हो सका। अधिकारियों ने भी सारी सीमाओं का लांघ दिया। आज तक विवेचना पुलिस कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर पाई। गौरतलब है कि वर्ष 2013 में शहर के भुजौली कॉलोनी में संजय केडिया ने साथियों के साथ पूर्व एमएलसी संजीव द्विवेदी उर्फ रामू के घर पर चढ़कर फायरिंग की थी। गोलीबारी में आफताब घायल हो गया। मौके पर संजय केडिया की गाड़ी बरामद हुई थी। कई फायर शुदा कारतूस भी मिले थे। पूर्व एमएलसी की तहरीर पर संजय केडिया, श्रीप्रकाश तिवारी सहित कई लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ। इस मामले में संजय केडिया ने भी संजीव द्विवेदी रामू पर क्रास केस दर्ज करवा दिया। दोनों तरफ से गैंगवार की चर्चा शहर में आज भी होती है। शहर कोतवाल विजय सिंह गौर ने बताया कि दोनों मामले अभी लंबित हैं। जांच कुशीनगर पुलिस के हाथ में है। चार्जशीट दाखिल कब होगी, जानकारी नहीं है।
पूर्वांचल में शराब का सबसे बड़ा कारोबारी
पूर्वांचल में शराब का सबसे बड़ा कारोबार संजय केडिया के पास है। देवरिया जिले में शराब का गोदाम है। केडिया के संपर्क में सैकड़ों लोग पूर्वांचल में कई सरकारी शराब की दुकान चलाते हैं। शासन में उसकी ऐसी पकड़ है कि अधिकारी भी उसके दरबारी हो जाते हैं। कई बार शराब की शिकायत हुई लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने उसे रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं।
दबिश के दौरान दरवाजे पर लगी भीड़
अंसारी रोड स्थिति संजय केडिया के आवास पर दबिश की सूचना मिलते ही कई लोग पहुंच गए। केडिया का काम देख रहे लोग मामले को रफा-दफा करने में जुट गए। शराब से जुड़े लोग, पूर्व जिला पंचायत सदस्य, शिक्षक और समाजसेवी सहित कई लोगों का जमावड़ा लगा रहा। अंसारी रोड पर दबिश के दौरान आसपास के लोग घरों से झांकते रहे।