देवरिया। कुख्यात अपराधी तार बाबू के सेरेंडर करने के बाद पुलिस राहत की सांस ले ही रही थी की कुछ ही दिन बाद उसकी जमानत हो जाने के बाद वह बैकफूट पर आ गई। इस प्रकरण को लेकर पुलिस पर सवाल भी उठने लगे हैं।
तार बाबू पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस अब नई रणनीति पर काम कर रही है। इस बीच कोर्ट में प्रभावशाली पैरवी नहीं होने पर जमानत की बात सामने आने पर एसपी मोहम्मद इमरान ने बनकटा और भाटपाररानी के थानेदारों से रिपोर्ट मांगी है। हालाकि जेल में रिहाई परवाना नहीं पंहुचने के कारण तार बाबू अभी बाहर नहीं आ सका है।
पशु तस्करी के मामले में भाटपाररानी पुलिस बनकटा इलाके के रुस्तम बहियारी में प्रधान के घर दबिश देने पहुंची थी। इसी दौरान बदमाश तारबाबू ने समर्थकों के साथ पुलिस पर फायरिंग कर दी। वारदात के बाद तत्कालीन एसपी प्रभाकर चौधरी ने गांव में कैंप लगाकर तार बाबू की गिरफ्तारी के लिए शिकंजा कसा था। पुलिस पर फायरिंग मामले में करीब उन्नीस लोगों को नामजद किया गया। घटना को अंजाम देने के बाद तार बाबू भागने में सफल रहा। उसके ऊपर डीआईजी ने दस हजार का इनाम रखा था।
तारबाबू पर सत्ता पक्ष के ओहदेदारोें का बरदहस्त था। उसके खिलाफ हुई कार्रवाई के विरोध में कुछ लोग लामबंद हो गए। एसपी प्रभाकर चौधरी का तबादला हो गया। एसपी के तबादले के पीछे बदमाश तारबाबू के पक्ष में सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों का लामबंद होना बाताया जा रहा है। एसपी का तबादला होते ही तार बाबू ने राजनीतिक संरक्षण को चोला ओढ़कर कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
नवागत एसपी को उनके अधीनस्थों ने तारबाबू प्रकरण की कोई जानकारी नहीं दी। उसकी जमानत जब अखबार की सुर्खिया बनी तो एसपी को पूरे प्रकरण की जानकारी हुई। उन्होंने पुलिस की ओर से तारबाबू के खिलाफ अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा की बात कही है। जेल अधीक्षक रंग बहादुर पटेल ने बताया कि जमानत की अर्जी जेल पर अभी नहीं आई है। तार बाबू जिला कारागार में है।