रामपुर कारखाना थाने में रविवार को तेज विस्फोट से कांस्टेबल के दोनों हाथों के पंजे उड़ गए। पुलिस के मुताबिक अलाव में धोखे से पटाखा डाल देने से दुर्घटना हुई। हाथ सेंकने के दौरान जख्मी हुए कांस्टेबल को अस्पताल की सलाह पर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया है।
हादसे की जद में आकर दोनों हाथों के पंजे गंवाने वाले अजीत सिंह (45) संतकबीरनगर जिले के सिंह टीकर गांव के मूल निवासी हैं। रामपुर कारखाना थाने में तैनाती के दौरान मुंशी का दायित्व निभा रहे अजीत रविवार दोपहर करीब तीन बजे थाना परिसर में जल रहे अलाव के पास हाथ सेंकने पहुंचे और उसी बीच विस्फोट की चपेट में आ गए। तेज धमाके की आवाज से थाने में अफरा-तफरी मच गई। अजीत को अस्पताल लेकर गए साथी पुलिस कर्मियों ने बताया कि दिवाली पर जब्त किए अवैध पटाखों में से कुछ एक थैली में अलाव के पास रखे थे। अनजाने में अजित ने आंच तेज करने के लिए थैली को कबाड़ समझकर अलाव में डाल दिया और दुर्घटना हो गई।
जिला अस्पताल में इलाज देकर अजीत को मेडिकल कॉलेज रेफर करने वाले चिकित्सकों का कहना है कि दिवाली के पटाखे से इतना तगड़ा विस्फोट नहीं हो सकता कि दोनों पंजे उड़ जाएं। इस बीच अस्पताल पहुंचे एसपी राकेश सिंह ने भी हादसे की वजह पटाखा फटना बताया। साथ ही यह भी कहा कि पटाखे का अलाव तक पहुंचना लापरवाही है। इसकी जांच कराएंगे।
...तो वक्त से पहले ही हो गया ‘बड़ा धमाका’
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। रामपुर कारखाना थाना परिसर में विस्फोट से कांस्टेबल के हाथों के पंजे उड़ने के पीछे पुलिस भले अलाव में धोखे से पटाखा पहुंच जाने की बात कह रही है लेकिन दबी जुबान बाहर आ रही चर्चाओं में कुछ और ही माजरा बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि वर्कआउट की शक्ल में पुलिस की ‘बड़े धमाके’ की योजना के क्रम में विस्फोटक पदार्थ थाने लाया गया था।
थाने के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि एक बड़े बदमाश की गिरफ्तारी बम या घातक विस्फोटक के साथ दिखाने के होमवर्क के तहत मुखबिर के जरिए यह सामग्री थाने पहुंची थी। इस योजना से अंजान कांस्टेबल अजित सिंह उसे कबाड़ समझकर अलाव में डाल बैठे। इसके बाद हुए धमाके में दोनों हाथों के पंजे उड़ गए।
पुलिस की बताई जा रही थ्योरी पर सवाल थाने में मौजूद जब्त पटाखा स्टॉक और अलाव की दूरी से भी उठ रहा है। जानकार बताते हैं कि जिस स्थान पर दिवाली के दौरान जब्त पटाखे रखे हैं वह अलावा से करीब 15 फीट दूर है। ऐसे में पटाखे थैली में शिफ्ट होकर अलाव के करीब तक कैसे पहुंचे। थैली में पटाखे भरने की जरूरत क्यों पेश आई। फिलहाल पुलिस ऐसे सवालों के सीधे जवाब से बच रही है।
‘जब दोनों हाथ ही नहीं तो जीकर क्या करेंगे’
स्ट्रेचर पर दर्द से कराह रहे मुंशी की पीड़ा देख द्रवित हुए लोग
देवरिया।
मैंने किसका बिगाड़ा था कि दोनों हाथ भगवान ने छीन लिए। अब जीने का कोई मतलब नहीं है। स्ट्रेचर पर कराह रहे मुंशी की यह पीड़ा देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। सिपाही उसे ढांढस बंधा रहे थे। दर्द से परेशान मुंशी भगवान और अपने एक साथी को बार-बार कोस रहा था। लोगों की मानें तो पुलिस ने एक पॉलीथिन में बम रखा था। मुंशी को इसकी जानकारी नहीं थी और उसने आग में डाल दिया।
रामपुर कारखाना थाना परिसर में अलाव सेंकने के दौरान शक्तिशाली विस्फोट से मुंशी अजीत सिंह के दोनों हाथों के पंजे उड़ गए। विस्फोट इतना तेज हुआ कि करीब पांच किलोमीटर तक आवाज सुनाई दी। थाना परिसर धुआं-धुआं हो गया। विस्फोट से घबराए पुलिसकर्मी मुुंशी के चीखने-चिल्लाने के बावजूद खुद के बचाव में जुटे रहे। धुएं का प्रकोप कम होने के बाद पुलिस वाले उसे अस्पताल लाए। स्ट्रेचर पर मुंशी अजीत सिंह साथी सिपाही का बार-बार नाम पुकार रहा था और जबरन स्ट्रेचर से उतरने की कोशिश कर रहा था। लोग उसे पकड़े हुए थे और ठीक हो जाने की सांत्वना दे रहे थे। मुंशी थाने के एक सिपाही का नाम ले रहा था और बोल रहा था कि उसकी गलती से हादसा हुआ है। सूत्रों की मानें तो अलाव के पास कुछ देर पहले कई पुलिसकर्मी बैठे थे। एक युवक आया और एक सिपाही को पॉलीथिन देकर चला गया। अलाव के पास पॉलीथिन छोड़ पुलिस वाले चले गए। कार्यालय से निकलने के बाद मुंशी पहुंचा और पॉलीथिन को आग में डाल दिया। लेकिन पुलिस इससे इनकार कर रही है।