देवरिया। लखनऊ में मोनिका सिंह पर फायरिंग के आरोपी दिव्यांग शूटर सुनील जायसवाल ने शुक्रवार को कोर्ट में आत्मसमर्पण के पीछे देवरिया पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिस तरह से उसने एसओ पर फायरिंग के केस में जमानत वापस लिए जाने के बाद कोर्ट में आत्मसमर्पण किया है उससे माना जा रहा है कि शूटर को जमानत वापस लेने की अर्जी के बारे में सूचना मिल गई थी।
इसके बाद ही उसने समर्पण करने का कदम बढ़ाया। सुनील ने वर्ष 2012 में रुद्रपुर थानेदार सुखबीर सिंह पर फायरिंग की थी। सदर कोतवाली के खोराराम निवासी रामरक्षा पुत्र सुखारी, देवरिया खास निवासी जगदीश, रमाशंकर जमानतदार थे। शुक्रवार को ही रामरक्षा ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर जमानत वापस ले ली और उसी दिन मोनिका सिंह पर हमले के सुनील ने अपर जिला जज कक्षा संख्या-दो के कोर्ट में सरेंडर कर दिया। ऐसे में शूटर के सेरेंडर को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि दिव्यांग शूटर के कोर्ट में सरेंडर करने की वजह देवरिया पुलिस है। क्योंकि प्रार्थना पत्र की जानकारी कोर्ट मुहर्रिर के अलावा अन्य पुलिस कर्मियों को भी थी। गौरतलब है कि लखनऊ के कृष्ण नगर क्षेत्र के होटल स्काई हिल्टन के बाहर बीते दिनों मानस नगर निवासी मोनिका सिंह पर जानलेवा हमले के मामले में केडिया की गिरफ्तारी के बाद पुलिस सरगर्मी से उसके शूटर सुनील को तलाश रही थी। शुक्रवार को उसके सेरेंडर के बावजूद घटना के करीब 20 दिन बीत जाने पर भी मामले के बाकी आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।