नागालैंड में ड्यूटी के दौरान बोलेरो खाई में गिरने से एसएसबी जवान की मौत हो गई। असम के तेजपुर हेड क्वार्टर से कमांडेंट ने बुधवार को लार थाना क्षेत्र के रावतपार अमेठिया स्थित उनके घर इस बात की जानकारी दी। खबर सुनकर घरवालों में चीख-पुकार मच गई। गांववालों का जमघट दरवाजे पर लग गया। बृहस्पतिवार को जवान का शव घर पहुंचेगा।
थाना क्षेत्र के रावतपार अमेठिया गांव निवासी रिटायर्ड रेलकर्मी प्रेमप्रकाश सिंह के बेटे अतुल सिंह (35) एसएसबी में कांस्टेबल थे। उनकी तैनाती असम के तेजपुर हेड क्वार्टर पर थी। इन दिनों नागालैंड में चुनाव ड्यूटी लगी थी। मंगलवार को चुनाव संपन्न कराने के बाद टीम के साथ वह ईवीएम बोलेरो से लेकर कंट्रोल रूम जा रहे थे। काफिले में 35 बोलेरो शामिल थीं। देर रात को वह जिस बोलेरो में सवार थे, वह खाई में पलट गई। इसमें अतुल सिंह की मौत हो गई और अन्य साथी गंभीर रूप से जख्मी हो गए। बुधवार की सुबह नौ बजे पिता के मोबाइल पर तेजपुर हेड क्वार्टर से कमांडेंट ने फोन कर दुर्घटना में अतुल की मौत होने की जानकारी दी। इस घरवाले बदहवास हो गए। इनकी चीख-पुकार सुनकर लोगों की भीड़ जुट गई। अतुल के पिता ने बताया कि हेड क्वार्टर पर बात हुई है। हवाई जहाज से बृहस्पतिवार को शव पटना आएगा। वहां से सड़क मार्ग से दरवाजे पर एसएसबी जवानों के देख-रेख में शव में आएगा।
घरवालों पर वज्रपात, गांव में होली फीकी
लार।
एसएसबी जवान अतुल कुमार सिंह की मौत ने गांववालों को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे ने घरवालों पर वज्रपात कर दिया जबकि गांववालों की होली फीकी हो गई। दरवाजे पर पहुंचे लोग अतुल की अच्छाइयों की चर्चा कर भावुक हो जा रहे थे।
रावतपार अमेठिया गांव निवासी अतुल कुमार सिंह तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़े थे। वह बहुत ही मिलनसार और मेहनती थे। वह मेहनत के बल पर वर्ष 2007 में एसएसबी में कॉस्टेबल पद पर भर्ती हुए। इसके बाद घर की आर्थिक हालत काफी हद तक सुधर गई। वर्ष 2010 में उनकी शादी गोरखपुर की अनुराधा से हुई। दोनों के बीच पांच साल की बेटी परी और एक सात माह का बेटा कृष्णा है। भाई अनूप सिंह घर रहते हैं और छोटा भाई अनुज लखनऊ में पढ़ाई करता है। वह नवंबर में बेटे के छठिहार में शामिल होने घर आए थे। मंगलवार की रात आठ बजे ईवीएम लेकर कंट्रोल रूम जाते वक्त अतुल अपने पिता के पास फोन किए थे। उन्होंने त्योहार की तैयारी तथा घरवालों की कुशलक्षेम पूछी। दोनों के बीच करीब 20 मिनट तक बात हुई और अप्रैल में घर आने की बात कही। होली की तैयारी में जुटे घर वालों को क्या पता था कि कि रंगों का त्योहार बदरंग हो जाएगा। बुधवार को सुबह पिता प्रेमप्रकाश सिंह दरवाजे पर बैठे थे और महिलाएं घर के अंदर पकवान बनाने की तैयारी कर रही थी। इसी बीच पिता के मोबाइल की घंटी बजी और महिलाओं की चीत्कार से गांव गूंज उठा। घटना से अंजान गांववाले भागे-भागे दरवाजे पर पहुंचे। अतुल की नागालैंड में हादसे में मौत की खबर सुने तो सबको काठ मार गया। अतुल नौकरी में जाने के बावजूद गांववालों से जुुड़े रहे। गांव के युवाओं के पास अक्सर उनका फोन आता था।
घर के अकेले कमाऊ सदस्य थे
लार। अतुल घर के अकेले कमाऊ सदस्य थे। पिता के रिटायर होने के बाद नौकरी पाने के बाद वह घर चला रहे थे। एक बहन की शादी हुई है जबकि दूसरी बहन की शादी घरवाले तलाश रहे थे लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।
वॉलीबॉल खेलने के शौकीन थे
लार। अतुल वॉलीबॉल और क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ी थे। गांव में छुट्टी पर आने के बावजूद वह वॉलीबॉल खेलने के लिए खेल प्रतियोगिताओं में जाया करता था।