आबकारी के रडार पर हैं जिले के 55 गांव
तहसील स्तर पर गठित की गई टीम, एसडीएम और सीओ भी शामिल
इंस्पेक्टर को रोजाना कार्रवाई और क्षेत्र भ्रमण की करनी होगी रिपोर्टिंग
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। कच्ची शराब बनाने और बेचने वालों से आबकारी विभाग सख्ती से निपटेगा। कच्ची के धंधे में बदनाम 55 गांव चिह्नित किए गए हैं, जो चुनाव में जिम्मेदारों के लिए चुनौती बनेंगे। धंधेबाजों से निपटने के लिए तहसील स्तर पर टीम गठित की गई है।
चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए कच्ची शराब के इस्तेमाल की आशंकाओं को देखते हुए आयोग ने आबकारी विभाग को कड़े निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने जिले में ऐसे 55 गांवों को चुना है। कच्ची शराब का धंधा ही यहां के लोगों का धंधा बन चुका है। ऐसे धंधेबाजों और चिह्नित गांवों पर आबकारी विभाग शिकंजा कसेगा। हालांकि कच्ची शराब का हब बन चुके गांवों में रोक लगाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। तहसील स्तर पर टीम बनाई गई है। टीम में एसडीएम, सीओ, आबकारी इंस्पेक्टर और स्थानीय थानेदार शामिल किए गए हैं। जिला आबकारी अधिकारी अश्वनी कुमार ने बताया कि टीम का गठन कर दिया गया है। टीम में शामिल आबकारी इंस्पेक्टर प्रत्येक दिन का क्षेत्र भ्रमण और कार्रवाई की रिपोर्ट देंगे। चिह्नित गांवों पर विशेष नजर रहेगी।
पुलिस के जाने से पहले भाग जाते हैं कारोबारी
चुनाव में शराब और कबाब का बोलबाला रहता है। मतदाताओं को अपने पक्ष में वोट डालने के लिए समर्थक और प्रत्याशी इसका उपयोग करते हैं। लार, बरहज और मईल थानाक्षेत्र के दियारा में कच्ची शराब बनाने की शराब की मिनी फैक्ट्री संचालित होती है। धंधेबाजों पर अंकुश लगाने में आबकारी विभाग और पुलिस फिसड्डी साबित होती है। दियारा में कभी हिम्मत जुटाकर पुलिस जाती है लेकिन धंधेबाज नहीं पकड़ में आते हैं। शराब बरामद, लहन नष्ट और भट्ठी ध्वस्त करने तक कार्रवाई होती है। लार थानाक्षेत्र के पिंडी के दियारा में लार के तत्कालीन एसओ अशोक पांडेय के नेतृत्व में छापेमारी की गई थी। बलिया जिले के धंधेबाज दरोगा यादव समेत कई लोगों पर केस दर्ज हुआ था। राजनीतिक दबाव में आई पुलिस ने लीपापोती कर दिया। यही हाल मईल के चक्कीमुसा डोही और बरहज के परसिया देवार का है।
ईट भट्टों पर बनती है कच्ची शराब
जिले में करीब 250 ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। अधिकांश ईंट-भट्ठों पर कच्ची शराब बनाकर बेचा जाता है। आबकारी विभाग की सूची में एक भी ईंट-भट्ठों का नाम शामिल नहीं है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कच्ची के धंधेबाजों की बनाई गई सूची सिर्फ खानापूर्ति है।