देवरिया। बालगृह बालिका कांड में अति उत्साह और जल्दबाजी के कारण कठघरे में खड़ी हुई पुलिस ने एक और चूक कर दी है। पुलिस ने अवैध संस्था में लड़कियों को रखे जाने के बाबत कोर्ट में दाखिल जवाब में थानाध्यक्षों के तबादले की बात कही है, जबकि जिले में इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस कांड का पर्दाफाश होने से पूर्व कुछ एसओ को जरूर हटाया गया था, लेकिन उन पर भ्रष्टाचार या अपराधियों को संरक्षण देने जैसे अन्य आरोप थे। पिछले महीने ही कई एसओ ने इस संस्था में लड़कियों को शरण दिलाई थी। सभी अपने थानों में यथावत जमे हैं।
कोर्ट में पुलिस की ओर से यह जवाब दायर किया गया है।
पांच अगस्त को बालगृह बालिका में छापामारी कर 23 लड़कियों को मुक्त कराते हुए पुलिस ने देह व्यापार और यौन उत्पीड़न का दावा किया था। राष्ट्रीय स्तर पर मामला सुर्खियों में आने के बाद शासन ने सीबीआई जांच के आदेश देते हुए एसआईटी भी गठित की। उधर, हाईकोर्ट ने भी मामले का स्वत: संज्ञान लेते सरकार से जवाब मांगा था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर सरकार की ओर से मंगलवार को जवाब दाखिल किया गया। इसमें कहा गया कि मान्यता स्थगित होने के बाद संस्था में 18 थानों की पुलिस ने लड़कियों को शरण दिलाई थी। सभी थानाध्यक्षों का तबादला कर दिया गया है, जबकि हकीकत इससे इतर है। 18 जुलाई को ही तरकुलवा पुलिस ने एक युवती को संस्था की सुपुर्दगी में दिया था। इसके बाद 23 जुलाई को उसे यहीं से कोर्ट में पेश किया। तब तरकुलवा एसओ विनय कुमार सिंह थे, जो अब भी हैं। इससे पहले रामपुर कारखाना पुलिस और फिर बरहज की एक लड़की को यहां शरण दिलाई गई थी। यह एसओ भी अब तक जमे हैं। 23 जून 2017 को संस्था की मान्यता स्थगित होने के बाद सौ से भी अधिक लड़कियों को यहां रखा गया है। 19 सितंबर 2017 को डीएम की ओर एसपी को पत्र लिखे जाने के बाद ही 77 लड़कियों को शरण दिलाई गई है। पांच अगस्त को बालिका गृह कांड उजागर होने के बाद से किसी भी एसओ का न तबादला हुआ और न ही कोई अन्य कार्रवाई। इस मामले में पुलिस का कोई भी अफसर कुछ भी बोलने से कतरा रहा है। सुनवाई के लिए गए एसपी मंगलवार को नहीं लौटे थे, जबकि प्रभारी एसपी गणेश साहा ने मामला एसआईटी के हवाले होने की दलील दी।
भ्रष्टाचार के आरोप में नपे कई एसओ
पिछले कुछ महीनों में जिले के कई थानों के एसओ बदले गए हैं, मगर इनमें से किसी पर भी संस्था में लड़की को शरण दिलाने के मामले में कार्रवाई नहीं हुई है। भटनी एसओ को छेड़खानी के आरोपी पूर्व चेयरमैन के खिलाफ केस दर्ज नहीं करने पर निलंबित कर एफआईआर दर्ज की गई, जबकि लार एसओ पर शराब तस्करों को शह देने पर कार्रवाई हुई। खामपार एसओ को भी भ्रष्टाचार के आरोपों में ही हटाया गया है। रुद्रपुर कोतवाल के लाइनहाजिर होने के पीछे फरियादी के साथ गलत व्यवहार कारण रहा तो वहीं भलुअनी, रामपुर कारखाना, बरहज, सलेमपुर, देवरिया, एकौना, भाटपाररानी, मईल सहित अन्य थानों में एसओ जनहित का हवाला देकर रुटीन प्रक्रिया में बदले गए हैं।