देवरिया। पौने दो साल तक जिला जेल में रहे अतीक अहमद के काले कारनामे उजागर होने के बाद शिकंजा कसता देख अब करीबी खुद को बचाने में जुट गए हैं। खुफिया विंग और सर्विलांस सेल के रडार पर आए कई चिह्नित भूमिगत हो गए हैं।
अप्रैल 2017 से 31 दिसंबर 2018 तक जिला जेल में बंद रहे पूर्व सांसद अतीक ने इस अवधि में अपने लोकल नेटवर्क को मजबूत किया है। इसके लिए उसने गुर्गों की मदद ली तो जेल में निरुद्ध बंदियों-कैदियों को भी जरिया बनाया। वह उनकी हर तरह से मदद करता था। यही कारण रहा कि जेल से जाने के बाद जब डीएम के निर्देश पर चार सदस्यीय टीम और लखनऊ के सीओ जांच के लिए पहुंचे तो अतीक के एहसान तले दबे किसी भी बंदी या कैदी ने मुंह नहीं खोला। उनकी तरह ही जेल के बाहर भी अतीक के कई एहसानमंद हैं, जिनका इस्तेमाल अतीक अपने गैर कानूनी कार्यों को बढ़ावा देने में लेता था। कारोबारी मोहित जायसवाल का प्रकरण सामने आने के बाद जब शासन ने अतीक पर शिकंजा कसना शुरू किया तो करीबी भी निशाने पर आ गए। अतीक की सरपरस्ती में लंबे समय से धाक जमाने वाले अब पुलिस की निगाह में आने से बचने के लिए भूमिगत हो गए हैं। उनके मोबाइल नंबर भी बंद हैं। पुलिस की सर्विलांस सेल ने जेल में अक्सर अतीक से मिलने वालों के नामों के आधार पर छह नंबरों को चिह्नित किया है। यह नंबर दो दिनों से लगातार बंद आ रहे हैं। उनकी मौजूदगी भी जिले में नहीं है। इससे जांच टीमों को अधिक माथापच्ची करनी पड़ रही है। हालांकि पुलिस भी अब नए पैतरे से उन तक पहुंचने की जुगत लगा रही है।
बैरक में साथ रहे बंदियों पर भी टेढ़ी निगाह
जिला जेल की बैरक नंबर सात में अतीक के साथ रहने वाले बंदियों पर भी अफसरों की निगाह टेढ़ी हो चुकी है। मोहित की पिटाई करने वालों में इनका नाम सामने आ चुका है। यह माना जा रहा है कि लंबे समय से एक साथ बैरक में रहने के कारण वह अतीक के नाम पर अन्य तरह से भी लाभ उठाते रहे होंगे। लिहाजा वह भी अपने स्तर से अतीक की मदद में पीछे नहीं होंगे। पुलिस उनके दोस्त, परिवार और रिश्तेदारों के माध्यम से भी मामले की तक खंगालने की कोशिश में हैं।