देवरिया। बरहज रोड स्थित एक नर्सिंग होम में बुधवार को महिला मरीज की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। नाराज लोगों ने मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। नर्सिंग होम संचालक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। सूचना पर पहुंची सदर कोतवाली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराते हुए जाम समाप्त कराया। घरवालों की तहरीर के आधार पर पुलिस कार्रवाई में जुट गई है।
भलुअनी थानाक्षेत्र के सोनबरसा गांव के रहने वाले राजनाथ गौंड़ यातायात विभाग गोरखपुर में एचसीपी हैं। मंगलवार को पत्नी जड़ावती देवी (50) को शुगर बढ़ने और पेट में सूजन होने पर वह ट्यूबवेल कॉलोनी में डॉ. उमाकांत पांडेय की क्लीनिक पर ले गए। जांच के बाद चिकित्सक ने मरीज को बरहज रोड स्थित सावित्री नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया। आईसीयू में भर्ती जड़ावती को बुधवार की सुबह पति राजनाथ ने चाय पिलाई और कुछ देर बाद रोटी-दाल खिलाई। राजनाथ ने बताया कि दोपहर बाद उनकी तबीयत गंभीर होने लगी। बार-बार अस्पताल के स्टाफ से कहा जाता रहा, लेकिन वे लोग अनदेखा करते रहे। करीब दो बजे एक स्टाफ पहुंचा और सीने को पंप करने लगा। बताया कि जड़ावती की मौत हो गई। परिवारवालों ने लापरवाही का आरोप लगाया तो अस्पताल संचालक के कर्मचारियों ने उन्हें डांटकर भगा दिया। परिवारवालों ने अस्पताल से बाहर निकलकर सड़क जाम कर दिया। सूचना मिलने पर सदर कोतवाल यादवेंद्र बहादुर पाल फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवारवालों को समझाकर जाम खत्म कराया। केस दर्ज कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। करीब तीन घंटे तक यहां गहमागहमी का माहौल बना रहा। सदर कोतवाल यादवेंद्र बहादुर पाल ने बताया कि अस्पताल का सीसीटीवी फुटेज लेकर धमकी देने वालों कर्मचारियों की पहचान की जाएगी।
तहसीलदार, एसीएमओ ने पहुंचकर लिया रिकॉर्ड
देवरिया। सावित्री नर्सिंग होम में मरीज की मौत और हंगामा की खबर मिलने पर एसडीएम सदर दिनेश मिश्र ने तहसीलदार और सीएमओ को मौके पर भेजा। अधिकारियों ने कुछ रिकॉर्ड लिए और चार चिकित्सकों की कमेटी बनाकर पूरे प्रकरण की जांच का आश्वासन दिया।
तहसीलदार सदर सतीश कुमार, एसीएमओ डॉ. संजय चंद और सुरेंद्र सिंह शाम चार बजे सावित्री नर्सिंग होम पहुंचे। तीनों अधिकारियों ने अस्पताल के डॉक्टर आरके सिंह से घटना की बाबत जानकारी ली। उनसे मरीज और ड्यूटी से संबंधित सभी कागजातों की प्रति ली। राजनाथ गौंड़ ने अधिकारियों को बताया कि यहां अप्रशिक्षित कर्मचारी रखे गए हैं। उनकी लापरवाही से ही पत्नी की मौत हुई। एसीएमओ डॉ. सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल से मरीज और कर्मचारियों के रिकॉर्ड लिए गए हैं। पूरे प्रकरण की जांच के लिए चार डॉक्टर की कमेटी बनाई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
तीन बेटों की शादी नहीं कर पाई जड़ावती
देवरिया। भलुअनी के सोनबरसा गांव के रहने वाले राजनाथ और जड़ावती देवी केे पांच बेटे गिरिजेश, बृजेश, अखिलेश, विवेक, करुणेश हैं। जड़ावती देवी को कुछ साल पहले हृदय की बीमारी हो गई। लखनऊ के किसी अस्पताल में ब्लॉक हुईं दो नसों का ऑपरेशन किया गया। उनके दो बेटों गिरिजेश और बृजेश की शादी हो गई है। शेष तीन बेटों की शादी करने की उनकी इच्छा अधूरी रह गई।
हृदय रोग से पीड़ित थी महिला
सावित्री नर्सिंग होम के संचालक अशोक राय ने बताया कि जड़ावती देवी को डॉ. उमाकांत पांडेय देख रहे थे। वह हृदय रोग से पीड़ित थीं। डॉक्टर ने बता दिया था कि वह सीरियस हैं। परिवार के लोगों के कहने पर ही उन्होंने भर्ती किया था। रात को वह देखकर गए थे। बुधवार की सुबह उनके आने से पहले मौत हो गई। इसके बाद वे लोग हंगामा करने लगे।
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प्रसव के दौरान नवजात की मौत, हंगामा
भाटपाररानी। स्थानीय पीएचसी पर बुधवार को प्रसव के दौरान बच्चे की मौत पर तीमारदारों ने जमकर हंगामा मचाया। वे ड्यूटी पर तैनात नर्स और दाई पर लापरवाही का आरोप लगा रहे थे। मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। उधर, प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से हालत गंभीर होने पर प्रसूता को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
बनकटा थाना के ग्राम रामपुर बैदवली के रहने वाले दुर्गेश ठाकुर गर्भवती पत्नी ज्ञानती देवी (28) के साथ खामपार थाना के ग्राम भठवा तिवारी स्थित रिश्तेदारी में आयोजित शादी समारोह में आए थे। बुधवार की सुबह पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर दुर्गेश ने भाटपाररानी पीएचसी के प्रसव केंद्र पर भर्ती कराया। सुबह साढ़े 10 बजे प्रसव हुआ तो बच्चा मृत था। प्रसूता की हालत भी बिगड़ने लगी। स्थिति नियंत्रण से बाहर होते देखकर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। नाराज परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। दुर्गेश ठाकुर, चाचा दीपक ठाकुर, मुन्ना ठाकुर, मां बृजकिशोरी देवी सहित अन्य परिजनों का आरोप था कि केंद्र पर तैनात स्टाफ नर्स और दाई ने जच्चा के पेट पर पैर और हाथ से निर्दयतापूर्वक दबाव दिया, जिस कारण गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई। वह बार-बार सुरक्षित उपचार न होने की दशा में रेफर करने की बात कहते रहे, लेकिन उन्हें आश्वस्त किया गया था कि कोई दिक्कत नहीं होगी। नर्स और दाई की लापरवाही से ही बच्चे की मौत हुई है। कार्रवाई की मांग को लेकर उन्होंने काफी देर तक अस्पताल में हंगामा किया। सूचना पाकर भाटपाररानी पुलिस मौके पर पहुंची। किसी तरह घरवालों को शांत कराते हुए नवजात के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा। थानाध्यक्ष शिवशंकर चौबे ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत का कारण स्पष्ट होगा। इसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। उधर, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि परिजनों का आरोप निराधार है। बच्चा पहले ही मर गया था। कर्मचारियों ने अपने स्तर से पूरी सावधानी बरती।
प्रसव केंद्र पर 14 घंटे में दूसरी मौत से उठे सवाल
भाटपाररानी। पीएचसी पर स्थित प्रसव केंद्र पर दुर्व्यवस्था का बोलबाला है। 14 घंटे में ही केंद्र पर मौत का दूसरा मामला है। मंगलवार को अपराह्न साढ़े तीन बजे नगर के वार्ड नंबर आठ के रहने वाले सूरज पासवान की पत्नी किरन देवी (20) को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन पीएचसी के प्रसव केंद्र पर लाए थे। शाम साढ़े छह बजे किरन को लड़की पैदा हुई। प्रसव के कुछ देर बाद ही किरन की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन संदीप पासवान और मां उर्मिला देवी ने बताया कि मौके पर तैनात स्टाफ नर्स और दाई प्रसूता का उपचार करने की बजाए बार-बार रुपये की मांग कर रही थी। चिकित्सक भी बुलाने पर नहीं आ रहे थे और न ही रेफर कर रहे थे। बार-बार बीपी नापते रहे। रात आठ बजते-बजते किरन की मौत हो गई। उसके बाद भी स्टाफ नर्स और दाई रुपये की ही मांग करते रहे। परिजन चिकित्सक के कहने पर शव लेकर चले गए। लोगों का कहना है कि केंद्र पर तैनात कर्मचारियों की लापरवाही से ही लोग यहां आने से कतरा रहे हैं।