देवरिया। राजकीय बालगृह (बालक) से फरार तीनों किशोरों को करीब एक वर्ष पूर्व गोरखपुर के स्नेहालय खुला आश्रय शिशु गृह पादरी बाजार से यहां लाया गया था। वहीं आजमगढ़ निवासी चौथा किशोर ढाई वर्ष से यहां रहता था। चारों ने दिन में ही भागने का प्लान तैयार कर लिया था। बालगृह में मौजूद किशोरों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि खिड़की की जाली और लकड़ी काफी कमजोर थी।
दिन में जब क्लास चल रहा था, तभी उनमें से फरार एक किशोर ने खिड़की को पत्थर से तोड़ दिया था। बावजूद किसी जिम्मेदार को इसकी भनक तक नहीं लगी। बालगृह के कमरा नंबर एक में चारो किशोर रहते थे। कमरा नंबर तीन ही ऐसा है, जिसमें अटैच बॉथरुम है। लिहाजा ज्यादातर किशोर रात में इसी कमरे का इस्तेमाल करते हैं। मरम्मत के अभाव में कमरों की खिड़कियां जर्जर हो चुकी हैं।
कमरे के पीछे एक तरफ बाउंड्री की ऊंचाई भी कम है। ऐसे में किशोरों ने भागने के लिए इसी कमरे को चुना। संयोग यह था कि रात में दो होमगार्ड सहेंद्र यादव और श्यामदेव राय की ड्यूटी बालगृह पर लगी थी, लेकिन श्यामदेव राय ड्यूटी पर नहीं पहुंचा। इन परिस्थितियों का लाभ पाकर किशोर भागने में सफल रहे। पूरे मामले में जिम्मेदारों की लापरवाही साफ उजागर हो रही है। पुलिस ने भी अपनी जांच में प्रथम दृष्टया यही माना है। प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुुमार ने बताया कि बालगृह से किशोर का फरार होना गंभीर मामला है। डीएम से अनुमति मिलने के बाद मजिस्ट्रेटियल जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।