देवरिया। कचहरी के लॉकअप से बंदी के फरार होने के बाद 14 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। जांच के बाद सभी के खिलाफ कोतवाली में ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने का केस दर्ज कराया गया। कई पुलिसकर्मी लॉकअप ड्यूटी में गैरहाजिर मिले। उधर, फरार बंदी की तलाश में पुलिस ने कई जगहों पर छापामारी की। बंदी के चार करीबियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
गुरुवार को जिला कारागार से बंदियों को पेशी पर कचहरी लाया गया। पुलिस लाइंस से 14 पुलिसकर्मियों सहित तीन महिला सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई थी। जेल से कचहरी लॉकअप और कोर्ट में पेशी तक की सुरक्षा पुलिसकर्मियों के कंधे पर थी। हेड कांस्टेबल सुभाष सिंह, महबूब आलम और तूफानी यादव सुबह दस बजे पुलिस लाइंस से बड़ी वैन लेकर जेल पहुंचे थे। जिला कारागार से 46 बंदियों को कोर्ट में पेश होना था।
पुलिसकर्मी सभी का वारंट लेकर गाड़ी में बैठाकर और कचहरी लॉकअप पहुंचे। कोर्ट में जब बंदी को पेश करने की बारी आई तब तक कांशीराम आवास मेहड़ापुरवा निवासी अनिल सोनकर भाग चुका था। उच्चाधिकारियों को सूचना देने के बाद पुलिस ने अनिल की खोजबीन शुरू कर दी। लेकिन पुलिस सुरागकसी में फेल हो गई। एसपी, एएसपी की जांच में पुलिसवाले दोषी पाए गए। जांच में पता चला कि जिन 14 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी जेल से लॉकअप तक लगाई गई थी, वह गैरहाजिर थे। सिर्फ पांच पुलिसकर्मी 46 बंदियों को लेने जिला कारागार गए थे।
इसमें एक चालक भी था। इतना ही नहीं, कचहरी लॉकअप के पास भी पुलिसकर्मियों ने लापरवाही बरती। इस कारण बंदी अंदर से भाग गया। एएसपी की जांच रिपोर्ट पर पुलिस अधीक्षक ने हेड कांस्टेबल अर्जुन प्रसाद, सुभाष सिंह, एसआईसीपी विपिन बिहारी, एसआईसीपी प्रमोद वर्मा, मनोज, कांस्टेबल अनिल कुमार, सुग्रीव कन्नौजिया, अभयचंद यादव, दीपक कुमार, मिट्ठू राम, तूफानी सिंह यादव, महबूब आलम, चंदन प्रसाद, सीताराम को सस्पेंड कर दिया और सभी के खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी।
वहीं सिपाही सुभाष सिंह की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने फरार बंदी अनिल सोनकर सहित 14 पुलिसकर्मियों पर लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया है। सीओ सिटी डॉ. अजय सिंह ने बताया कि जांच के बाद सुरक्षा में लगे सभी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। सभी पर लापरवाही का केस दर्ज हुआ है। बंदी की तलाश जारी है। दूसरी आरे क्राइम ब्रांच की सीआईयू ने चार लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए आरोपियों पर पांच लाख रुपये के हेरफेर का आरोप है। बताया जाता है कि सभी एक कंपनी में काम करते हैं।