देवरिया। फरिश्ता बनकर पहुंचे रामकृपाल साहनी और सरल भारती ने मौत के भंवर में फंसी सात लोगों की जिंदगी बचाई। उनके चेहरे पर जान बचाने की खुशी कम और दो लोगों के डूबने का मलाल अधिक दिखा। जान पर खेलकर जीवनदान देने वाले मछुआरों की बहादुरी की लोग तारीफ कर रहे हैं।
कम दूरी तय कर देवार और मधुबन से लोगों को बरहज आने-जाने के लिए घाघरा नदी पर पीपा पुल पार करना पड़ता है लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद सिर्फ नाव ही सहारा रह जाता है। प्रत्येक दिन 300-400 लोग बरहज में दूध बेचने समेत अन्य काम के लिए आते हैं। इधर से लोग देवार में पशुओं का चारा लाने के लिए जाते हैं। प्रशासन की ओर से सिर्फ एक नाव की व्यवस्था की गई है, जो लोगों के आने-जाने के हिसाब से मुफीद नही है। इसलिए स्थानीय मछुआरे खुद की छोटी नाव चलाकर रुपये कमाते हैं। शनिवार दोपहर में छोटी नाव पर क्षमता से अधिक लोग सवार होकर बरहज के लिए चले। शुरुआती दौर में नाव डगमगाई। लोगों ने नाविक को टोका भी लेकिन नाविक ने लोगों की बातों को हल्के में लिया। नतीजतन बीच मझधार में नाव पलट गई। नदी किनारे मछली का शिकार कर रहे आजाद नगर (बरहज) के रामकृपाल साहनी और पटेल नगर पूर्वी के सरल भारती जान पर खेलकर पानी में कूद गए और दस मिनट में डूब रहे सात लोगों की जान बचा ली। वहीं राधेश्याम मद्देशिया समेत दो लोगों को नहीं बचा सके। इसका उन्हें पछतावा है। नाविक तपसी मल्लाह अपनी जान बचाकर भाग गया। अमीर चंद्र और उनकी पत्नी शारदा देवी की जान अकेले सरल ने बचाई।
शादी में भोजन बनाने गए थे बावर्ची
बरियारपुर के रामछबीला और राधेश्याम बावर्ची हैं। शुक्रवार को मऊ के मधुबन में एक शादी में भोजन बनाने के लिए गए थे। शनिवार को दोनों घर के लिए लौट रहे थे कि घाघरा नदी में राधेश्याम डूब गया और उसके साथी रामछबीला की जान बच गई। इसकी खबर मिलते ही शाम को नदी घाट पर राधेश्याम के घरवाले पहुंच गए।
पुलिस ने डेढ़ घंटे में नाविक को दबोचा
नाव पलटने के बाद नाविक तपसी मल्लाह अपनी जान बचाकर भाग निकला। शुरुआती दौर में दस लोगों के नदी में डूबने की बात सामने आई। इसको लेकर अफसर परेशान हो गए। डेढ़ घंटे की कोशिश में पुलिस ने बरहज के नाविक तपसी मल्लाह को खोज निकाला। मल्लाह के मुताबिक नाव पर छह साइकिल, चार बाल्टी दूध और नौ लोग सवार थे। जबकि लोग नाव पर 10 लोगों के सवार होने की बात कह रहे हैं।
क्षमता से अधिक नाव पर सवार थे लोग
जानकारों की मानें तो छोटी नाव पर चार से छह लोग बैठ सकते हैं लेकिन हादसे की शिकार हुई नाव पर दस लोगों के अलावा साइकिल व दूध का बाल्टी भी रखी गई थी। क्षमता से अधिक भार होने के कारण बीच में नदी में नाव पलट गई।