‘नजराने’ से तय होता था चावल का मानक
छह महीने में दो बार सीबीआई के हत्थे चढ़े एफसीआई कर्मी
कुशीनगर में घूस लेते पकड़े गए थे दो कर्मी, एक की हुई बहाली
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। एफसीआई गोदाम पर चावल लेकर पहुंचने वाले मिलरों से रकम वसूलने का खेल लंबे दिनों से चला आ रहा है। आवाज उठाने वाले मिलरों को इस कदर परेशान किया जाता था कि दोबारा शिकायत करने की हिम्मत नहीं होती थी। दस्तूरी की वसूली में एफसीआई के अफसरों की मुख्य सहभागिता है। पिछले वर्ष भी सीबीआई के एंटी करप्शन टीम ने कुशीनगर के अर्जुनहा एफसीआई गोदाम से घूस लेते हुए दो कर्मचारियों को पकड़ा था। इसमें एक को बहाल कर दिया गया है।
एफसीआई का रघवापुर गोदाम हो या उसरा बाजार बिना नजराना दिए चावल की डिलेवरी नहीं ली जाती थी। टालमटोल करने वाले मिलरों का चावल मानक का हवाला देकर लौटा दिया जाता था। एक ट्रक चावल लौटाए जाने पर मिलरों का करीब 30 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ता था। रघवापुर गोदाम पर तैनात घूस लेते तकनीकी सहायक नितेश पांडेय के पकड़े जाने के बाद इसकी परतें खुल रही हैं। एफसीआई के मंडल स्तर पर तैनात एक अफसर का कर्मचारियों पर इतना दबाव रहता था कि बिना रकम लिए चावल से लदे ट्रकों की इंट्री नहीं होती थी। यहीं वजह थी कि शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती थी। पांच जुलाई वर्ष 2018 को कुशीनगर के अर्जुनही गोदाम पर चावल डिलेवर कराने के लिए घूस लेते हुए क्वालिटी मैनेजर कंट्रोल और डिपो इंचार्ज को सीबीआई की एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार किया था। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने सबक नहीं लिया और घूसखोरी का खेल जारी रहा। इस बाबत एफसीआई के एरिया मैनेजर कुमार अभिषेक ने बताया कि घूस लेने वाले गिरफ्तार हुए तकनीकी सहायक को सस्पेंड कर दिया गया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच होगी। कुशीनगर में पकड़े गए दोनों कर्मचारियों में एक की बहाली हो गई है। लेकिन उसके खिलाफ जांच चल रही है।
उसरा और रघवापुर गोदाम से कई लाट चावल हुआ है रिजेक्ट
एफसीआई ने इस वर्ष रघवापुर गोदाम पर आने वाले 2430 क्विंटल चावल को डैमेज बताकर रिजेक्ट किया है, जबकि 12258 क्विंटल चावल की डिलेवरी हुई है। वहीं बनाए गए क्रय केंद्र पर 171 किसानों से करीब 5900 क्विंटल धान खरीदा गया है। वहीं उसरा बाजार एसएमआई गोदाम पर करीब 1.45 लाख क्विंटल चावल की डिलेवरी हुई है और 3510 क्विंटल चावल डैमेज होने पर रिजेक्ट किया गया है।
नए डिपो इंचार्ज आने के बाद वसूली हुई थी तेज
रघवापुर एफसीआई गोदाम पर डिपो का चार्ज अनुज गुप्ता के पास था। 27 दिसंबर को इनको हटाकर डिपो के एफसीआई मैनेजर ने ओंकार पांडेय को डिपो का इंचार्ज बनाया। मिलरों के अनुसार नए डिपो इंचार्ज के आने के बाद वसूली तेज हो गई थी। शिकायतकर्ता का चावल जब दुबारा 23 जनवरी को आया तो डिपो इंचार्ज ने लाट नंबर पर ओवर हैंडराइटिंग की बात कह वापस कर दिया। सीबीआई एंटी करप्शन की कार्रवाई के बाद दूसरे दिन डिपो इंचार्ज ओंकार पांडेय कार्यालय पर नजर नहीं आए।